फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

परी और रामनगर की कविता का डीएनए टेस्ट पीजीआई में होगा

Tue, 29 Sep 2015 11:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला पानीपत
विज्ञापन
विज्ञापन
सामान्य अस्पताल में पल रही बच्ची परी का एक बार फिर डीएनए टेस्ट होगा। इसको लेकर हाईकोर्ट ने एक अक्तूबर की तारीख तय की है।
विज्ञापन


इस बार परी के साथ बच्चा बदलने का आरोप लगाने वाली रामनगर कॉलोनी निवासी कविता और उसके पति अमित का भी डीएनए टेस्ट होगा। हाईकोर्ट के जस्टिस अजय तिवारी की एकल बेंच ने ये आदेश दिए। इसी के साथ याचिका का निपटारा कर दिया गया है।


रामनगर निवासी अमित और कविता ने दो डाक्टरों व एक नर्स पर आरोप लगाया था कि उन्होंने मिलीभगत के तहत कविता की कोख से जन्मा बच्चा बदल दिया। अमित का आरोप है कि उसकी पत्नी ने पुत्रको जन्म दिया, लेकिन नर्स व डॉक्टर कह रहे हैं कि उसने पुत्र को नहीं बल्कि पुत्री को जन्म दिया।
विज्ञापन


अमित और कविता ने बच्ची को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। अमित की शिकायत पर दो डाक्टरों व नर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। डॉक्टर और नर्सों का कहना था कि डीएनए टेस्ट मधुबन लैब से कराया जाए, जबकि दंपति का कहना था कि वहां निष्पक्ष टेस्ट नहीं हो सकेगा, लिहाजा पीजीआई चंडीगढ़ से टेस्ट कराना उचित होगा। अब कोर्ट ने चंडीगढ़ पीजीआई से टेस्ट कराने का आदेश दिया है।

अमित की तरफ से उनके वकील हरविंदर पाल सिंह पेश हुए और पुलिस की तरफ से बस अड्डा चौकी प्रभारी ने वकील के माध्यम अपनी रिपोर्ट पेश की। हाईकोर्ट के जस्टिस ने डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है। इसके लिए उन्होंने पानीपत प्रशासन व पुलिस को भी आदेश दिए हैं।

रामनगर निवासी परिवार पुलिस व प्रशासन के खिलाफ खुलकर सामने आ गया है। कविता के ससुर राजबीर ने बताया कि वे पहले दिन से कविता व बच्ची परी का डीएनए टेस्ट कराने की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन चंडीगढ़ जांच कराने को तैयार हुआ तो नैन गांव व ऊंचा समाना निवासी कविता नाम की महिलाओं को भी बीच में ले आया। प्रशासन व पुलिस डॉक्टरों की लापरवाही को छुपाने के लिए हेराफेरी कर रहे हैं।

राजबीर ने बताया कि वे पहले दिन से मधुबन की बजाय चंडीगढ़ में डीएनए टेस्ट कराने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन चंडीगढ़ नहीं तो दिल्ली में डीएनए करा सकता है, लेकिन वे मधुबन के लिए तैयार नहीं हैं।

सवाल- एक
कविता व उसके पति अमित का कहना है कि बच्चा उनका बदला गया है। नैन व ऊंचा समाना निवासी दोनों कविता अपने-अपने बच्चों को लेकर गई हुई हैं। उनका उन पर कोई आरोप नहीं है। नैन गांव व ऊंचा समाना निवासी कविता को भी बीच में क्यों लाया जा रहा है।

सवाल-दो
बच्ची हुई तो दूध पिलाने को बच्चा क्यों दिया
रामनगर निवासी और कविता के ससुर राजबीर ने बताया कि कविता की डिलीवरी के बाद डॉक्टर ने लड़की होने की बात कही लेकिन कविता को दोनों बार दूध पिलाने को लड़का दिया गया। उसके हाथ पर अमित और कविता के नाम का टैग लगा हुआ था। वे उनको किसी दूसरे का बच्चा दूध पिलाने को दे सकते हैं तो बच्चा बदल भी सकते हैं।

यह है मामला
सिविल अस्पताल में रामनगर निवासी कविता ने 17 जून को शिशु को जन्म दिया। 18 जून को तब हंगामा खड़ा हो गया जब कविता ने अस्पताल कर्मियों पर बच्चा बदलने का आरोप लगाया। कविता के अनुसार डिलीवरी के वक्त उसको लड़की पैदा होने के बारे में बताया गया लेकिन दूध पिलाने के लिए लड़का देते रहे। थाना शहर पुलिस ने कविता की शिकायत पर डॉक्टर व स्टाफ नर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। प्रशासन ने 10 सितंबर को रामनगर निवासी कविता समेत उस दिन सिविल अस्पताल में डिलीवरी कराने वाली नैन निवासी कविता व ऊंचा समाना करनाल निवासी कविता को भी जांच में शामिल किया। यहां पर तीनों कविता व बच्ची का डीएनए टेस्ट कराने का फैसला लिया गया। प्रशासन व पुलिस की मांग पर चंडीगढ़ लैब ने 28 सितंबर की तारीख दी। पुलिस ने तीनों कविता को इसका नोटिस दिया, लेकिन रामनगर निवासी कविता प्रशासन के साथ चंडीगढ़ लैब में डीएनए कराने नहीं पहुंची। प्रशासन व पुलिस ने बच्ची परी और नैन व ऊंचा समाना निवासी कविता का सोमवार 28 सितंबर को चंडीगढ़ में डीएनए करा दिया। रामनगर निवासी कविता पहले ही डीएनए को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुकी थी।
विज्ञापन


अमित की याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई में पेश हुए थे और अपनी पूरी बात रखी है। हाईकोर्ट ने अमित के मामले को डिसमिस करते हुए उनको पुलिस स्टेशन में एक अक्तूबर को पेश होने के आदेश दिए हैं। उनका मांग के अनुसार डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। वे पुलिस का साथ नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी जा सकती है।
भीम सिंह, प्रभारी, बस अड्डा चौकी पानीपत।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें