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नवजातों के संरक्षण के लिए शहर में सात स्थानों पर लगेंगे पालने

Mon, 19 Sep 2016 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ पानीपत
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पानीपत - फोटो : bureau
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 प्रशासन ने शहर में दो दिन में तीन नवजातों को सड़क पर छोड़ने के मामले को गंभीरता से लिया है। प्रशासन ने ऐसे नवजातों और बच्चों के लिए शहर में सात पालने लगवाने का फैसला लिया है।
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इसके लिए लघु सचिवालय के द्वितीय तल स्थित मीटिंग हॉल में रविवार को एक कार्यशाला हुई। इसमें मुख्य अतिथि उपायुक्त डॉ. चंद्र शेखर खरे की पत्नी और रेडक्रॉस की चेयरपर्सन डॉ. रजनी गोयल थीं।  कार्यशाला मेें डॉ. रजनी गोयल खरे ने कहा कि गत दिनों पानीपत में जन्म के बाद बच्चियों को दुत्कार देने की घटनाओं ने सोचने पर मजबूर कर दिया है।

सरकार ने पीसीपीएनडीटी एक्ट को सख्ती से लागू किया है, तो अब बच्चियों को जन्म के बाद छोड़ देने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। यह चिंता का विषय है। ऐसे लोगों को बच्चे या बच्चियों को लावारिस हाल में छोड़ने की बजाय नि:संतान दंपति या अन्य लोगों को दे देना चाहिए।
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ऐसे दंपति आसानी के साथ से बच्चों को एडॉप्ट कर सकते हैं। लावारिस नवजतों के मिलने पर डॉ. रजनी ने जिले में सात स्थानों पर पालने लगाने के निर्देश संबंधित लोगों को दिए। डॉ. रजनी गोयल खरे ने इसके बाद वर्कशाप में पहुंचीं कुछ बच्चियों से बात की।

उनसे कहा कि वे मन लगाकर पढ़ाई करें। इससे पहले डॉ. रजनी का वर्कशॉप में पहुंचने पर स्वागत किया गया। यहां डॉ. रजनी सिविल अस्पताल के स्पेशल वार्ड में पहुंचीं। वहां उन्होंने तीनों नवजातों का हाल जाना।

डीएसपी बोलीं, पहले जागरूकता फिर सख्ती
महिला थाना डीएसपी विद्यावती ने कहा कि बच्चों की हत्या कर देना या फिर लावारिस छोड़ देना गंभीर मामला है। इन बच्चों को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग जागरूकता के बाद भी नहीं समझ पाते हैं, तो उनको कानून की भाषा से समझाना होगा।
 
लिंगानुपात हुआ 832 से 900
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सीएमओ डॉ. इंद्रजीत धनखड़ वर्कशाप में पहुंचे। उन्होंने धन्यवाद सत्र में कहा कि 2013 में उनके कार्यभार संभालने के वक्त जिले में लिंगानुपात 1000 लड़कों पर 832 लड़कियों का था। सरकार के सख्ती करने पर अब जिले में 1000 लड़कों पर 900 लड़की हैं। उन्होंने अफसोस जताया कि उनके कार्यकाल में सात बच्चियां लावारिस मिली हैं। उन्होंने कहा कि वे अब कोख के बाहर भी हत्या को रोकेंगे।

मंच पर अपनाते हैं, घर में दुत्कारते हैं
महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी उषा अरोड़ा ने कहा कि 22 जनवरी 2015 को पानीपत की धरती से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत हुई थी। कुछ लोग मंच पर तो बेटियों को अपना लेते हैं, लेकिन घर पर दुत्कारते हैं। लड़के की चाहत में लड़की को मरवा देना गलत है।


एडॉप्ट करने वाले अभिभावक बहुत  
जिला बाल संरक्षक अधिकारी निधि गुप्ता ने बताया कि आज जिले समेत प्रदेश और देश में बच्चों को एडॉप्ट करने वाले पेरेंट्स की संख्या ज्यादा है, जबकि बच्चे अपेक्षाकृत कम है। जिले की एजेंसी को छह-सात बच्चे इस साल मिले हैं।

इन सब बच्चों को दंपतियों ने एडॉप्ट कर लिया है। प्रदेश में फिलहाल तीन एजेंसी हैं। अगले कुछ दिनों में इनकी संख्या बढ़कर पांच हो जाएगी। इस समय पंचकूला में शिशु गृह, सोनीपत के राई में बाल ग्राम और तीसरा फरीदाबाद में है। झज्जर, हिसार में बाल गृह जल्द ही बनेंगे।

पालने में बच्चा छोड़ते ही आ जाता है मोबाइल में मैसेज
करनाल स्थित बाल भवन केंद्र के संचालक पीआर नाथ ने वर्कशाप में कहा कि उन्होंने दो बच्चों के साथ करनाल में बाल भवन केंद्र शुरू किया था। वर्तमान में इसमें 108 बच्चे हैं।

उन्होंने बाल भवन केंद्र में 14 नवंबर 2014 में पालना घर स्थापित किया था। इसमें एक डिवाइस लगाई है। बच्चा पालने में रखते ही डिवाइस के माध्यम उनके मोबाइल पर मैसेज आ जाता है या फिर फिर बाल भवन केंद्र का सायरन बजने लग जाता है।

दो साल में छह बच्चे पालन घर से उनके पास पहुंचे हैं। इनमें चार लड़की ओर दो लड़के हैं। दो बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया। अन्य की परवरिश की जा रही है।



यहां-यहां लगाए जाएंगे पालने
1. सेक्टर-11/12 स्थित मदर टैरेसा होम के बाहर।
2. शिवनगर स्थित बाल श्रमिक पुनर्वास केंद्र के बाहर।
3. सिविल अस्पताल पानीपत।
4. समालखा सीएचसी।
5. रेडक्रॉस अस्पताल जीटी रोड पानीपत।
6. गुरुद्वारा पहली पातशाही जीटी रोड पानीपत।
7. प्राचीन देवी मंदिर पानीपत।

ऐसे किया जा सकता है बच्चा एडॉप्ट
बच्चा एडॉप्ट करने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रे्रशन करवाना पड़ता है। इसको लेकर आईडी प्रूफ, रिहायशी प्रमाण पत्र, मैरिज सर्टिफिकेट, फैमिली फोटो, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट, तीन संबंधियों की जानकारी और आयु प्रमाण पत्र देना होगा। व्यक्ति किन्हीं तीन राज्यों को चुन सकता है।

यह है शर्त
अकेला पुरुष किसी भी बच्ची को एडॉप्ट नहीं कर सकता। एक महिला बच्चे या बच्ची किसी को एडॉप्ट कर सकती है।
बच्चा एडॉप करने के लिए कम से कम 25 साल की उम्र होनी चाहिए।
दंपति की शादी को कम से कम दो साल पूरे हो गए हों और दोनों की सहमति होनी चाहिए।
बच्चा एडॉप्ट करने के बाद 40 हजार रुपये का डीडी या बैंक ड्राफ्ट संबंधित एजेंसी को देना होगा।
बच्चा एडॉप्ट करने के दो साल तक होम स्टडी की जाएगी।
 
इसलिए पड़ी अभियान की जरूरत
बुधवार 14 सितंबर को हुडा सेक्टर-11/12 में सूरज बांगा व विकास जैन के मकान के बाहर टोकरी में दो नवजात बच्चियां मिली थीं। दोनों जुड़वा लग रही थीं। अगले दिन वीरवार को सेक्टर-25 स्थित एक पेट्रोल पंप के साथ लगते खाली प्लाट में एक नवजात बच्चा मिला था। सभी को सिविल अस्पताल के स्पेशल वार्ड में दाखिल किया गया है। इससे पहले एक साल में करीब सात बच्चे और बच्चियां लावारिस हाल में मिल चुके हैं।
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