उग्रा खेड़ी गांव में आरक्षण की मांग को लेकर धरने पर बैठे लोगों के बाद अब सिवाह के लोगों ने भी गांव में धरने पर बैठने की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले साल आरक्षण आंदोलन में सिवाह के लोगों ने शहर को जलने से बचाया था, लेकिन प्रशासन और पुलिस ने उन्हीं के खिलाफ मुकदमे दर्ज करा दिए। अब कोर्ट की कार्रवाई शुरू हो गई है। प्रशासन और पुलिस ने मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। दूसरी तरफ, उग्रा खेड़ी गांव में पांचवें दिन का धरना शांतिपूर्वक रहा। समिति ने पांच सदस्यीय चंदा कमेटी गठित की और चंदे का पैसा पिछले आंदोलन में मरने वाले और जेल में बंद लोगों के आश्रित परिवारों को सहायता राशि के रूप में देने का फैसला लिया। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी धरनारत लोगों की हर गतिविधि पर नजर रखे रहे हैं।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले उग्रा खेड़ी गांव में जाट आरक्षण का अनिश्चितकालीन धरने का वीरवार को पांचवां दिन रहा। समिति पदाधिकारियों ने अपने 24 घंटे के धरने के फैसले को वापस लेते हुए शाम पांच बजे तक ही धरने का फैसला लिया। संघर्ष समिति के राष्ट्रीय सचिव प्रताप दहिया ने बताया कि गांव का फैसला ही सर्वमान्य होगा। संघर्ष समिति के सदस्यों के अनुसार फिलहाल यह धरना सुबह नौ से शाम पांच बजे तक ही चलेगा। इस धरने में भाग लेने के लिए कैथल से भी पांच सदस्यों की टीम वीरवार दोपहर को धरना स्थल पर पहुंची और जाट समाज का उत्साह बढ़ाया। कैथल से पहुंचे बन्नी सिंह ने कहा कि जब से भाजपा सरकार बनी है तब से नौकरियां गायब हो गई हैं। वह यह नहीं जानती कि जाट आरक्षण के लिए हर कुर्बानी दे सकता है।
उन्होंने कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री के बयान का भी खंडन किया है। बनी सिंह ने कहा कि जाट किसी धमकी से डरने वाला नहीं है। यदि फिर भी सरकार ने जाट समाज के लोगों को धरने से खदेड़ने का प्रयास किया तो पानीपत को कैथल का पूरा समर्थन होगा। अब तो हर हाल में आरक्षण की मांग को पूरा करवाकर ही चैन लेंगे। संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव सुरेंद्र मलिक ने कहा कि मुख्यमंत्री कुछ मामलों को खत्म करने के बयान देते हैं, लेकिन पानीपत के पिछले साल हुए आंदोलन में 23 लोगों पर दर्ज मुकदमों में से एक को भी खत्म नहीं किया गया है। इस अवसर पर एडवोकेट रणदीप घनघस, संघर्ष समिति के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रणधीर नैन, संघर्ष समिति के जिला प्रधान सतबीर देशवाल, रणबीर, कैथल के प्रैस प्रवक्ता भरत सिंह, शीला व राममेहर मौजूद रहे।
रागिनी और चुटकलों से किया मनोरंजन
वीरवार को उग्रा खेड़ी की चौपाल में गांव सींक के राजबीर मलिक द्वारा लाई गई टीम द्वारा रागिनी का गायन किया गया। जिससे ग्रामीणों का खूब मनोरंजन हुआ। इसके साथ ही राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित दरियाव सिंह मलिक के चुटकलों ने भी धरने में बैठे लोगों को हंसा-हंसाकर लोट पोट कर दिया। मलिक ने चार मिनट का अपना भाषण भी दिया। जिसमें उन्होंने पहले कला के बारे में पूरी जानकारी दी। मलिक ने कहा कि लोगों को कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए और हमेशा भाईचारे की भावना से मिलकर काम करना चाहिए।
झोली फैला मांगा सहयोग
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय सचिव प्रताप सिंह दहिया ने धरने में लोगों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से अपील की है कि वे हर घर से एक सदस्य को धरने में शामिल होने के लिए जागरूक करें। दहिया ने अपनी झोली भी फैलाई। उग्रा खेड़ी की चौपाल में दिए जा रहे धरने में युवाओं की भी संख्या अच्छी खासी देखने को मिल रही है। दहिया ने महिलाओं से भी धरने में शामिल होने की अपील की है। आज के धरने में उनकी माता शांति व उनकी पत्नी कमलेश ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
पांच सदस्यीय चंदा कमेटी बनाई
गांव उग्रा खेड़ी में चंदा एकत्रित करने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। कमेटी की कमान डाहर निवासी रामचंद्र को सौंपी गई है, जबकि पाथरी के मास्टर बलजोरा सिंह व गांव कवी से सतबीर बैनीवाल, बुड़शाम से संजय गुलिया को कमेटी का सदस्य बनाया गया है। एक अन्य सदस्य समालखा क्षेत्र से बनाया जाएगा। जो एक-दो दिन में गठित चंदा कमेटी में शामिल कर लिया जाएगा। आज वीरवार को गठित की गई चंदा कमेटी में 10 हजार का चंदा एकत्रित किया गया। चंदा देने की शुरूआत कमेटी के अध्यक्ष रामचंद डाहर में 11 सौ रुपये देकर की। उनके साथ ही वरिष्ठ एडवोकेट जगदीप घणघस ने 21 सौ रुपये चंदे के रूप में दिए। समिति पदाधिकारियों ने उग्रा खेड़ी के ग्रामीणों की धरने में सहयोग देने की सराहना की। प्रताप दहिया ने बताया कि वीरवार से एकत्रित होने वाले चंदे को आंदोलन में मारे गए व जेलों में बंद लोगों के आश्रित परिवारों को सहयोग के रूप में दिया जाएगा।
सिवाह के ग्रामीणों ने धरना देने की दी चेतावनी
सिवाह गांव के कई लोगों ने पिछले साल हुए आंदोलन के बाद दर्ज मुकदमों को लेकर रोष प्रकट किया और उन्होंने भी गांव में धरना शुरू करने का फैसला लिया। ग्राम पंचायत सरपंच खुशदिल कादियान सूचना मिलते ही ग्रामीणों के बीच पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को प्रशासन व पुलिस के सहयोग से अवगत कराया। ग्राम पंचायत सरपंच व ग्रामीण इसके बाद प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों से मिले। जहां पर ग्रामीणों ने अपनी मांग रखी। उन्होंने कहा कि फरवरी 2016 में हुए आरक्षण आंदोलन में जीटी रोड पर सिवाह गांव में कुछ लोगों ने जाम लगा दिया था। सिवाह के ग्रामीणों ने आक्रोशित लोगों को शांत करने के साथ प्रशासन का सहयोग दिया था। सरकार गांव में आयोजित प्रदेश स्तरीय समारोह में ग्रामीणों के सहयोग की सराहना कर चुकी है और ग्राम पंचायत को सम्मानित भी किया गया है। पुलिस ने इसके बाद सिवाह के करीब 19 लोगों पर मुकदमा दर्ज कर कोर्ट का नोटिस भेज दिया गया।
गांव के कुछ लोग पिछले साल दर्ज मुकदमों से आहत हैं। उन्होंने गांव में अब फिर धरना देने की चेतावनी दी थी। ग्रामीणों को समझाकर शांत कर दिया गया है और उनकी प्रशासन व पुलिस अधिकारियों के साथ मीटिंग भी करा दी गई है। गांव में किसी तरह की स्थिति बिगड़ने नहीं दी जाएगी और प्रशासन व पुलिस का पूरा सहयोग दिया जाएगा।
खुशदिल कादियान, सरपंच, ग्राम पंचायत, सिवाह।