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रहीमपुर खेड़ी के घर पहली बार बिजली से रोशन हुए

Tue, 10 Jun 2014 11:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
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सनौली में यमुना के तटबंध में बसा रहीमपुर खेड़ी गांव अब बिजली से गुलजार हो गया है। वर्षों से मिट्टी के दीयों में तेल की बाती जलाने वाले बाशिंदे अब आधुनिकीकरण की मुख्यधारा में शामिल हुए हैं।
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पानीपत के बेचिराग कहे जाने वाले इस गांव में अब शाम होते ही बिजली चमकने लगती है। यमुना के बीच में सीमेंट के पिलर खड़े कर उन पर बिजली के तार लगाने की बात शायद ही कभी किसी के मन में आई हो।

लेकिन यमुना के बीच में खड़े इन पिलराें में सन्नाटे के साथ गुजरने वाली बिजली की आहट रहीमपुर खेड़ी का रहने वाला ही महसूस कर सकता है।

ग्रामीण सुरेश कुमार बताते हैं कि कि इसके लिए विधायक धर्म सिंह छौक्कर ने अथक प्रयास किया है जिनके कारण गांव में बिजली पहुंच सकी।

लगता था हम नक्शे में नहीं
सतबीर गिरी ने बताया कि करीब 15 परिवारों के इस गांव की सुध लेने वाला कोई नहीं था। हमने इस गांव को कई बार बसते और उजड़ते देखा है। यह हरियाणा का ऐसा गांव होगा जहां बिजली की आपूर्ति ही नहीं थी। कई बार हमें ऐसा लगता था कि हम दुनिया के नक्शे में ही नहीं हैं।
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रिश्तेदारों के घर पढ़ रहे बच्चे
वहीं कृष्ण गिरी ने बताया कि गांव में बिना बिजली के जानवरों का खतरा हमेशा बना रहता है। उन्होंने कहा कि गांव में किसी भी तरह की शिक्षा का कोई भी माध्यम नहीं है। बच्चे या तो घर पर ही हैं या अपने रिश्तेदारों के घर पढ़ने के लिए रह रहे हैं। आज घर में उजियारा देखकर खुशी हो रही है।

हौसलों को बल मिला है
दसवीं कक्षा की छात्रा रानी ने बताया कि वह उझा गांव में रिश्तेदारों के यहां पढ़ती है। वजह है कि गांव में बिजली न होना। गांव में कोई स्कूल भी नहीं है। इसके कारण उन्हें बाहर भी आने-जाने में परेशानी होती थी। इसी कारण उन्होंने रिश्तेदार के यहां पढ़ाई जारी रखी। गांव में लाइट आने से रानी के हौसलों को बल मिला है।

अब टीवी देख सकेंगे
गांव की ही एक महिला बेदो परिवार के सदस्यों के साथ फू ली नहीं समा रही है। उसका कहना है कि बिजली आने से लोग टीवी के माध्यम से देश प्रदेश और अपने जिला के हालातों पर नजर रख सकेंगे। इससे पहले हम टीवी भी लगा सकते थे। क्योंकि गांव बिजली नहीं थी।
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