डेयरी और बूचड़खानों शहर को स्वच्छ बनाने में सबसे बड़े रोड़ा हैं। इन दोनों मुद्दों को शहर की सरकार सदन में पास कर चुकी है। दस साल गुजर गए, लेकिन डेयरी और बूचड़खाने शिफ्ट नहीं हो सके हैं। अधिकारी शहर को ओडीएफ मुक्त बनाने में तो लगे हैैं, लेकिन सड़कों पर घूमने वाले सूअरों के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
इसके विरोध में पूर्व मेयर बुधवार को सूअर और मुर्गा लेकर नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने निगम कमिश्नर के कार्यालय में न मिलने पर एसई की कुर्सी के पास सूअर को बैठा दिया। पूर्व मेयर ने इसके बाद सूअर से ही फरियाद लगाई। निगम अधिकारियों ने शहर की समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया है।
पूर्व मेयर एवं वार्ड-11 पार्षद भूपेंद्र सिंह बुधवार को एक भैंस, सूअर और मुर्गा लेकर नगर निगम कार्यालय पहुंचे। उन्होंने यहां पर सरकारी अधिकारियों और सीएम विंडो में दी शिकायत की कॉपी की माला भैंस के गले में डाली। साथ ही बीन बजाते हुए जीटी रोड से होकर नगर निगम कार्यालय पहुंचे।
पूर्व मेयर ने कहा कि वे अधिकारियों और सरकार से कई बार समस्याओं के समाधान की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। भैंस और मुर्गा के निगम की सीढ़ियों पर न चढ़ने पर वे सूअर को लेकर ही अधिकारियों के कार्यालय में पहुंच गए। उन्हें निगम कमिश्नर वीना हुड्डा कार्यालय में नहीं मिलीं
तो वे एसई एनडी वशिष्ठ के कार्यालय पहुंच गए। वहां पर उन्होंने एसई की कुर्सी के पास सूअर को बैठा दिया। इसके बाद एसई से सुअर की समस्या सुनने की फरियाद की। इस हरकत से सकपकाए एसई ने पूर्व मेयर को आश्वासन देकर शांत किया।
दस साल बाद भी डेयरी नहीं हुईं शिफ्ट
शहर में डेयरी शिफ्ट करने का सिलसिला 2002 में शुरू हुआ था। 2007 में बिंझौल के पास खाली जमीन में डेयरियां शिफ्ट करने का फैसला हुआ। यहां पर इसके लिए करीब 198 प्लॉट काटे गए। इनमें से करीब 120 प्लॉट दे भी दिए गए। वार्ड-तीन पार्षद हरीश शर्मा ने उन्हीं दिनों प्लाटों के अलॉटमेंट पर तत्कालीन डीसी से शिकायत की थी।
डीसी ने इसके बाद 33 प्लाटों को रद्द कर दिया था। इन दस सालों में आठ या दस ही डेयरी शिफ्ट हो पाई हैं। डेयरियां शिफ्ट न होने से शहर के सीवर और नाले चोक हो रहते हैं। बारिश होने के बाद पानी की निकासी नहीं होती।
सदन में मंजूरी के बाद भी बूचड़खाने नहीं हुए शिफ्ट
सदन में मंजूर होने के बाद भी बूचड़खाने शहर से बाहर शिफ्ट नहीं हो पाए। शहर में सूअर भी घूम रहे हैं। सेक्टरवासी कई बार इसकी मांग कर चुके हैं और सदन में भी प्रस्ताव पास कर चुके हैं। बावजूद इसके बूचड़खाने शहर से बाहर नहीं हो पाए।
पूर्व मेयर ने सूअर मालिकों को सौ-सौ गज के प्लाट देकर इनके बाड़े बनवाने की मांग की है। इनके शहर से बाहर न जाने के कारण लोग परेशान होते हैं। इस वजह से शहर स्वच्छ नहीं हो पा रहा।
डेयरी और बूचड़खानों को शहर से बाहर निकालने की योजना है। इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ डेयरियों को शिफ्ट कर दिया गया। पुलिस की मदद से अन्य को भी जल्द शिफ्ट कर दिया जाएगा। बूचड़खानों को शिफ्ट करने का मुद्दा हाउस में पास हो गया है। इसे मंजूरी के लिए निदेशालय भेजा है।
एनडी वशिष्ठ, एसई, नगर निगम पानीपत।