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पुलिस को दौड़ाया, छावनी बना सामान्य अस्पताल

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पानीपत। बुधवार को सुबह होते ही सामान्य अस्पताल में अयूब के परिजन इकट्ठा होने शुरू हो गए। इसी बीच एक पुलिसकर्मी अस्पताल पहुंचा तो गुस्साएं परिजन उसके पीछे दौड़ पड़े। पुलिसकर्मी ने मुश्किल से जान बचाई। सूचना मिलते ही शहर थाना, महिला थाना, किला थाना, इसराना थाना, बापौली थाना और सिवाह पुलिस लाइन से सैकड़ों की संख्या में पुलिकर्मी पहुंच गए। डीएसपी वीरेंद्र सैनी, डीएसपी पूजा डाबला, डीएसपी मुख्यालय सतीश वत्स ने जिम्मेदारी संभाली।
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उधर, अयूब के शव का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के बोर्ड ने किया। इसमें डॉ. नारायण डब्बास, डॉ. राजीव मान, डॉ. राघवेंद्र शामिल रहे। बोर्ड ने करीब चार घंटे तक जेएमआईसी देवेंद्र कुमार के सामने वीडियोग्राफी करते हुए पोस्टमार्टम किया। विसरा को जांच के लिए लैब भेजा गया। अयूब के शरीर पर काफी चोट के निशान मिले हैं। डॉक्टरों का कहना है कि विसरा रिपोर्ट आने बाद मौत के कारण का पता चलेगा।
दो थाना प्रभारी, दो तहसीलदार और सीईओ की निगरानी में दफनाया
पुलिस प्रशासन को आशंका थी कि परिजन शव रखकर रोड जाम कर सकते हैं इसलिए पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अयूब के शव को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को विद्यानंद कॉलोनी स्थित कब्रिस्तान में दफनाया गया। चांदनीबाग थाना प्रभारी हरविंद्र सिंह, शहर थाना प्रभारी सुनील कुमार, सीईओ विवेक चौधरी और तहसीलदार कुलदीप पानीपत और तहसील इसराना की निगरानी में शव को दफनाया गया।
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प्रत्यक्षदर्शी की बजाए पुलिस को बनाया शिकायतकर्ता
दिलशाद ने कहा कि अयूब की उसके सामने टॉर्चर हत्या की है। ऐसे में शिकायतकर्ता उन्हें ही बनाना चाहिए था। पुलिस ने उनकी शिकायत तो ली, लेकिन प्रथम शिकायतकर्ता एमएचसी रामनिवास को बनाया है। उनकी मांग है कि मारपीट के दौरान एएसआई के साथ सिविल ड्रेस में खड़े चार और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए।
तपती फर्श पर नग्न लिटाया, मुंह पर तौलिया रख गर्म पानी डाला : दिलशाद
पानीपत। अयूब के दामाद नूर मोहम्मद के भाई दिलशाद ने पुलिस उत्पीड़न की व्यथा सुनाई। दावा किया कि अयूब को तपती फर्श पर नग्न लिटाया गया था। मुंह पर तौलिया रख गर्म पानी भी डाला गया। इसी अत्याचार से अयूब की जान चली गई।
दिलशाद ने बताया कि 15 दिनों से एएसआई धर्मबीर उन्हें परेशान कर रहा था। एएसआई ने मंगलवार सुबह नौ बजे उसे और मामा अच्छन मियां को थाने बुलाया था और इरशाद (युवती को लेकर भागा युवक) के बारे में पूछताछ की थी। उन्हें थप्पड़ मारे और 10 बजे छोड़ दिया। उस समय थाने में युवती की मां के साथ, उसका मामा और चाचा भी मौजूद थे। दोपहर दो बजे फिर धर्मबीर का कॉल आया और भाई के ससुर अयूब को थाने लेकर आने के लिए कहा। वह अयूब के घर गए तो पता चला कि वह फैक्टरी में है। इसके बाद वह फैक्टरी गया और अयूब को लेकर शाम साढ़े चार बजे थाने पहुंचा।
दिलशाद के मुताबिक, एएसआई धर्मबीर उन्हें सीधा छत पर ले गया। जहां पर छत तेज धूप की वजह से तप रही थी। धर्मबीर के साथ युवती के चाचा सुमित, मामा सुनील और चार से पांच पुलिसकर्मी भी बैठे हुए थे। उनके सामने धर्मबीर ने अयूब के कपड़े उतरवा दिए और नग्न अवस्था में उसे फर्श पर लेटा दिया। उसके साथ मारपीट करने लगे। अयूब ने शोर मचाया तो उनके मुंह में गीला कपड़ा बांध दिया। मारपीट की वजह से वह बेहोश हो गए। उसके बाद 20 से 25 डिब्बे गर्म पानी के डालकर और उन्हें होश में लाए।
अयूब को बचाना चाहते हो तो 20 मिनट में 20 हजार का इंतजार करो
दिलशाद ने बताया कि धर्मबीर अयूब को पीट रहा था। उसने छुड़ाने का प्रयास किया तो उसने पास पड़ी टूटी प्लास्टिक की पाइप से उसे भी पीटा। उसने कहा कि अगर अयूब को छुड़ाना चाहते हो तो 20 मिनट में 20 हजार रुपये का इंतजाम कर लो। वह बाइक से घर आया और 20 हजार रुपये लेकर आया, उस समय भी वे अयूब को पीट रहे थे। वह रुपये देने लगा तो एएसआई बोला तू लेट हो गया, अब इसको रिमांड पर लिया जाएगा। लगातार मारपीट करने और पानी डालने की वजह से अयूब की नाक में पानी चला गया, जिस वजह उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई और कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई।
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