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अब चिकनगुनिया ने ली जान, स्वास्थ्य विभाग अनजान

Sun, 25 Sep 2016 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ पानीपत
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पानीपत - फोटो : bureau
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जिले में संदिग्ध डेंगू से मौत के बाद अब संदिग्ध चिकनगुनिया से एक दुकानदार की मौत हो गई। समालखा स्थित मनाना फाटक स्थित दुकानदार कई दिनों से संदिग्ध चिकनगुनिया से पीड़ित था। उसका दिल्ली के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। दूसरी तरफ नगर निगम का ठेकेदार का अब तक संदिग्ध डेंगू का इलाज चल रहा है।
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उसका भी दिल्ली के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। अब तक जिले में डेंगू और चिकनगुनिया के एक दर्जन से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग डेंगू और चिकनगुनिया के मामले सामने आने से इनकार कर रहा है। जिले में वायरल फीवर और डेंगू के बाद चिकनगुनिया भी तेजी से फैल रहा है।

अब समालखा निवासी पवन की संदिग्ध चिकनगुनिया से मौत हो गई। उसकी समालखा में मनाना रेलवे फाटक के पास किरयाना की दुकान थी। परिजनों के अनुसार पवन कई दिनों से संदिग्ध बुखार से पीड़ित था। परिजनों ने उसको इलाज के लिए दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
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वहां रिपोर्ट में चिकनगुनिया बताया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान पवन की मौत हो गई। इससे पहले दत्ता कॉलोनी निवासी बिंद्र की भी संदिग्ध डेंगू के कारण मौत हो चुकी है। डेंगू का तीसरा मामला तहसील कैंप क्षेत्र से आया है। वहां नगर निगम का ठेकेदार संदीप सिंह अब भी डेंगू की चपेट में आने से दिल्ली के एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन है।

संदीप ने बताया कि चार दिन पहले उसको बुखार आया था। वह इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में गया। वहां ब्लड जांच की रिपोर्ट में उसको डेंगू बताया गया। उसका दो दिन शहर के निजी अस्पताल में इलाज चला। तबीयत में सुधार न होने पर परिजनों ने उसको दिल्ली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया है।

वहां भी उसका डेंगू टेस्ट पॉजीटिव रहा। निजी अस्पतालों में लगातार आ रहे डेंगू और  चिकनगुनिया के मरीजों से शहर में हड़कंप है। निजी अस्पतालों ने इस बारे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी चेताया है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग ऐसे किसी मामले के सामने आने से इनकार कर रहा है।

मरीजों को नहीं मिल रहे बेड
सिविल अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए 60 बेड हैं। वर्तमान में वायरल फीवर, डेंगू, चिकनगुनिया के साथ ही मलेरिया तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार सिविल अस्पताल में वायरल फीवर के हर रोज 100 मरीज आ रहे हैं। संदिग्ध बुखार के मरीजों की भी सिविल अस्पताल में लंबी लाइन लगी रहती है। बड़ी संख्या में मरीज आने के कारण मरीजों को बेड मिलने में परेशानी हो रही है।

तहसील कैंप में चिकनगुनिया के आधा दर्जन मरीज
चिकनगुनिया जैसे बीमारी धीरे-धीरे पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले चुकी है। सूचना पर अमर उजाला की टीम सेक्टर 29 में पहुंची तो वहां चिकनगुनिया के मरीज मिले। इनके परिजनों ने बताया कि बुखार आने पर निजी अस्पताल में जांच करवाई थी। वहां बताया गया कि मरीज को चिकनगुनिया है। तहसील कैंप में भी करीब छह लोग चिकनगुनिया के मिले।

सैनी कॉलोनी के हालात गंभीर
शहर की सैनी कॉलोनी इस वक्त वायरल फीवर से जूझ रही है। कॉलोनी में कई बच्चों और बड़ों की हालत वायरल फीवर के कारण गंभीर है। बदलते मौसम के कारण बच्चे चमड़ी के रोग से भी ग्रस्त हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार बीमार लोगों के ब्लड सैंपल लेने के साथ ही दवाइयों का छिड़काव कर रही है।  

डॉक्टरों की कमी मरीजों पर भारी
सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण भी मरीजों को परेशानी हो रही है। डॉक्टरों की कमी के कारण हर रोज औसतन 150 मरीज एक डॉक्टर को देखने पड़ रहे है। सिविल अस्पताल में मात्र 32 डॉक्टर हैं, जबकि सिविल अस्पताल में कुल 48 डॉक्टरों आवश्यकता है।

चिकनगुनिया के लक्षण
डॉ. सुखदीप कौर ने बताया कि चिकनगुनिया पहले दक्षिण भारत में अधिक सक्रिय रहता था। कुछ साल से उत्तर भारत में भी इसके मरीज सामने आने लगे हैं। चिकनगुनिया और डेंगू में बहुत समानताएं है। चिकनगुनिया एडीज नामक मच्छर के काटने से होता है। यह भी एक प्रकार का वायरल फीवर है। इसके होने पर मरीज को पहले बुखार होता है। फिर ठंड लगने लगती है। मरीज के जोड़ों में दर्द होता है। हाथ-पैर जकड़ने लगते है।

चिकनगुनिया से बचाव के उपाय
घर में बर्तनों में पानी जमा न होने दें।
सोते वक्त पूरे कपड़े पहनें।
सोते वक्त मच्छरदानी का प्रयोग करें।
कुलर और पानी की टंकी में एक चम्मच मिट्टी का तेल डालें।
बाहर के खाने से परहेज करें।
तले हुए भोजन का कम से कम प्रयोग करें।


जिले में अब तक डेंगू और चिकनगुनिया का कोई मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव और कॉलोनियों में दवाइयों का छिड़काव कर रही हैं। कॉलोनियों में पहुंचकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ब्लड सैंपल ले रहे हैं। सिविल अस्पताल में भी डेंगू के लिए अलग से वार्ड बनाया गया है। जिले में वायरल फीवर के अधिक मामले आ रहे है। यह मौसम पर निर्भर करता है। स्वास्थ्य विभाग बीमारियों के प्रति पूरी तरह से सजग है।
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डॉ. इंद्रजीत सिंह धनखड़,सीएमओ पानीपत।
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