नोटबंदी के 35वें दिन भी बैंकों के सामने अपनी जमा पूंजी से नकदी निकलवाने को लाइन छोटी नहीं हो पाई, बल्कि तीन दिन के अवकाश के बाद खुले बैंकों के बाहर पहले से ज्यादा भीड़ नजर आई। लोगों की उम्मीद बैंकों से ही थी कई दिनों से एटीएम बंद होने से लोगों की जेब व हाथ खाली रहे।
मंगलवार को दिन निकलते ही बैंकों के सामने नकदी निकलवाने वालों की लाइन लगनी शुरू हो गई। कैश कम आया तो फिर खाली हाथ लौटना पड़ा। रामफल ने बैंक पर तीसरा चक्कर बताया है। दिलबाग, धर्मबीर, रणधीर व राममेहर ने भी अपना यही दर्द ब्यां किया। इसराना के कई बैंकों में मंगलवार को कैश लंच से पहले ही बांट दिया गया। स्कूल से गुरुजी जब बैंक पहुंचे तो कैश खत्म हो चुका था। मंगलवार को एचडीएफसी बैंक ने अपने उपभोक्ताओं को छह छह हजार की नकदी, ओबीसी बैंक ने चार-चार हजार, पीएनबी ने चार-चार हजार व एसबीआई ने अपने उपभोक्ताओं को दस-दस हजार की नकदी बांटी।
रसूखदारों की चांदी, आमजन परेशान
बसपा के पूर्व जिला प्रधान सतबीर पांचाल ने कहा कि सरकार द्वारा लिया गया नोट बंदी का फैसला बिना तैयारी के लिया गया कदम है। जो पूरी तरह से विफल हुआ है। हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल है। लोगों को अपनी मेहनत से जोड़ी पाई पाई को बैंक में निकलवाने के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं। छोटे काम धंधें पूरी ठप हो गए हैं। आमजन लाइन में लगा है, वहीं रसूखदार मलाई काट रहे हैं। उनकी तिजोरियों से करोड़ों की नई करेंसी निकल रही है। सरकार को चाहिए कि विदेशों से काला धन लाने का वायदा पूरा करें व आमजन को परेशान करना बंद करें।