अनाथ बच्चियों के उचित संरक्षण और ग्रांट के घोलमाल के आरोपों में घिरे जाटल रोड स्थित शोंदापुर अनाथालय बंद होगा। प्रशासन ने अनाथालय में इस समय रहने वाली सभी 33 बच्चियों को करनाल और राई आश्रमों या फिर नारी निकेतन में शिफ्ट करने का फैसला लिया है। प्रशासन इन बच्चियों का बुधवार को सिविल अस्पताल में मेडिकल कराएगा। इसको लेकर डॉक्टरों और पुलिस की टीम गठित कर दी गई है। अनाथालय प्रबंधन ने इस फैसले पर चिंता जताई है। साथ ही कई अधिकारियों पर ग्रांटों में हिस्सा मांगने के आरोप लगाए हैं। प्रबंधन का आरोप है कि प्रशासन के फैसले से दर्जनों बच्चियों की पढ़ाई बीच में छूट जाएगी।
लघु सचिवालय के कांफ्रेंस हॉल में बाल अनाथालय जाटल रोड शोंधापुर के बच्चों की समस्याओं पर विचार करने के लिए बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे ने की। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त राजीव मेहता, सीएमओ डॉ. इंद्रजीत सिंह धनखड़, डीडीपीओ रूपेंद्र मलिक, जिला शिक्षा अधिकारी उदय प्रताप सिंह, जिला बाल कल्याण अधिकारी प्रदीप मलिक, प्रभारी डीपीओ सरला यादव, जिला बाल कल्याण समिति की चेयरपर्सन सुमन सूद, रेलवे स्टेशन मास्टर धीरज कपूर, किरण मलिक, अजीत दहिया, हरिदास शास्त्री, डॉ. विकास सक्सेना आदि अधिकारी मौजूद रहे।
उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और इनके उज्जवल भविष्य के लिए सभी अधिकारियों और अन्य लोगों को विचार करना चाहिए। कहा कि इस अनाथालय में जो बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, उन्हें शिक्षा के सभी अवसर दिए जाएंगे। यदि आवश्यक हुआ तो हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी का भी सहयोग लिया जाएगा।
बुधवार को कराया जाएगा मेडिकल, होगी वीडियोग्राफी
डीसी ने कहा कि बाल अनाथालय के बच्चों को शिफ्ट करना बेहतर है। इससे पहले सभी बच्चियों की 18 जनवरी बुधवार को सुबह 9:30 बजे मेडिकल जांच करवाई जाएगी। इसके लिए सिविल सर्जन की अध्यक्षता में डाक्टरों की एक टीम गठित की जाएगी। जांच की वीडियोग्राफी भी करवाई जाएगी। बच्चों को उचित स्थानों पर भेजने के लिए परिवहन सुविधा दी जाएगी। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त राजीव मेहता ने जांच रिपोर्ट से उपायुक्त को अवगत करवाया। जिला बाल संरक्षण समिति की चेयरपर्सन सुमन सूद ने भी इन बच्चों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
1999 में शुरू हुआ था अनाथालय, प्रबंधन पर कई बार लगे आरोप
जन कल्याण समिति ने जाटल रोड शोंधापुर में 1999 में बाल अनाथालय शुरू किया था। करीब 1250 वर्ग गज जमीन में बनाए गए इस अनाथालय में वर्तमान में करीब 33 लड़कियां रह रही हैं। इनमें से 12 लड़कियां छठी से दसवीं कक्षा में पढ़ती हैं। समिति प्रधान अमरजीत नरवाल में बच्चियों की उचित देखरेख यहां तक की दुराचार तक के आरोप लगे। पिछले कई माह पहले भी प्रबंधन पर इसी तरह का एक आरोप लगा था। थाना मॉडल टाउन पुलिस ने इसमें मुकदमा तक दर्ज कर लिया था। बताया जा रहा है कि बच्ची द्वारा आरोपों को निराधार बताने पर प्रधान को कोर्ट से राहत मिल गई थी।
प्रधान बोले, अधिकारियों ने जीने लायक नहीं छोड़ा
बाल अनाथालय के प्रधान अमरजीत नरवाल ने बताया कि उन्होंने बच्चियों की सेवा के लिए बाल अनाथालय शुरू किया था। उनका सारा परिवार इस सेवा में लगा हुआ है। उनके यहां सब बच्चियों को बेटी माना जाता है। लोगों से मदद लेकर अनाथालय चलाया जा रहा है। जनकल्याण समिति को साल 2000 में 11 लाख रुपये की ग्रांट मिली थी। उन्होंने पूरी ग्रांट अनाथालय पर खर्च कर दी। उन्हें प्रशासन से किसी तरह का नोटिस नहीं मिला और न ही अधिकारियों ने मौका मुआयना किया। दो अधिकारियों की मनमर्जी की रिपोर्ट पर इतना बड़ा फैसला ले लिया गया। अधिकारियों के फैसले ने उन्हेें शहर में जीने लायक नहीं छोड़ा।
शोंधापुर स्थित बाल अनाथालय को लेकर लंबे समय से अनियमितता सुनी जा रही थीं। प्रबंधन ने ग्रांटों का भी हिसाब नहीं दिया था। ऐसे में बच्चों को करनाल या फिर राई आश्रम में शिफ्ट करने का फैसला लिया है। बच्चियों की शिक्षा संबंधित हर समस्या का प्रशासन समाधान करेगा।
डॉ. चंद्रशेखर खरे, डीसी पानीपत।