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बच्चियां बोलीं, अनाथालय से हमारी लाश ही निकलेगी

Thu, 19 Jan 2017 12:00 AM IST
amar ujala beuro panipat
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c - फोटो : amar ujala
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 जाटल रोड शोंधापुर स्थित बाल अनाथालय से बच्चियों को शिफ्ट करने के आदेश पर हंगामा हो गया है। अनाथालय की बच्चियां प्रबंधन समिति के प्रधान अमरजीत नरवाल की अगुवाई में बुधवार को लघु सचिवालय पहुंचीं और उपायुक्त से मिलीं। यह देख उपायुक्त ने बाल अनाथालय प्रधान को जमकर फटकारा। कहा कि यह क्या नौटंकी लगा रखी है। छह माह का रिकॉर्ड पेश करें और बाल अनाथालय चलाएं। प्रधान ने वीरवार को रिकॉर्ड पेश करने की बात कही। इसके बाद उपायुक्त ने बच्चियों को शिफ्ट करने की कार्रवाई को एक दिन के लिए टाल दिया। साथ ही कार्रवाई का जिम्मा एसडीएम को सौंपा। इस दौरान एक बच्ची की सौंपी चिट्ठी से अनाथालय प्रबंधन के दावे हवा होते नजर आए। चिट्ठी में बताए गए तथ्यों के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने सख्त रुख अपना लिया है।  
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प्रधान अमरजीत नरवाल बाल अनाथालय की बच्चियों के साथ लघु सचिवालय पहुंचे और  सीडब्ल्यूसी कार्यालय में चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी की चेयरपर्सन सुमन सूद से मिले। उन्होंने कहा कि बच्चियों को शिफ्ट करने का फैसला लेने से पहले एक बार बच्चियों से भी पूछना चाहिए था। प्रशासन ने उन्हें कोई नोटिस तक नहीं दिया गया। इस पर सुमन सूद ने कहा कि मंगलवार को उपायुक्त ने बैठक में बच्चियों को शिफ्ट करने के आदेश दिए थे। वे उन्हीं का पालन कर रहे हैं। नरवाला इसके बाद सभी बच्चियों को लेकर डीसी के पास पहुंच गए। डीसी को देखते ही बच्चियां रोने लगीं। डीसी ने उन्हें शांत किया। साथ ही प्रधान नरवाल को अनाथालय का पूरा रिकार्ड सौंपने के आदेश दिए।

ग्रांट में घोलमाल का आरोप
बाल अनाथालय को सरकार ने 2015 में 11 लाख रुपये की ग्रांट दी थी। आरोप है कि इस ग्रांट को बच्चों पर खर्च न कर, अपने प्रयोग में लाया गया। अनाथालय प्रधान को ग्रांट के खर्च संबंधी रिकार्ड पेश करने के आदेश दिए थे, लेकिन उन्होंने रिकॉर्ड पेश नहीं किया। इस पर डीसी ने मंगलवार को बाल अनाथालय के बच्चों को शिफ्ट करने के आदेश दे दिए। जाटल रोड शोंधापुर स्थित बाल अनाथालय में इस समय 33 बच्चे हैं। इनमें दो लड़के भी शामिल हैं। बाल अनाथालय में रहने वाले बच्चों को शिफ्ट करने के आदेेश मिलने के बाद बुधवार सुबह चिकित्सकों की टीम बच्चों का मेडिकल करने बाल अनाथालय पहुंची।
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किनको कहां शिफ्ट किया जाएगा
चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी की चेयरपर्सन सुमन सूद ने कहा कि बाल अनाथालय में रहने वाले बच्चों में से 18 बच्चों को राई बालग्राम में शिफ्ट किया जाएगा। इनमें एक लड़का भी है। दो बच्चियों को मेंटल रिटायर्ड मदर टेरेसा अंबाला, तीन बच्चियों को एमडीडी बाल भवन करनाल और 10 बच्चों को मदर टेरेसा पानीपत में शिफ्ट किया जाएगा। इन दस बच्चों में एक लड़का शामिल है।

कुछ ने जताई सहमती तो कुछ ने विरोध
लघु सचिवालय पहुंची बच्चियों ने रोते हुए रटी-रटाई बातें कहीं। इनमें से कुछ बच्चियों ने बाल अनाथालय में रहने तो कुछ ने अपने घर जाने की इच्छा जताई। इनसे अलग कुछ बच्चियों ने आरोप लगाए कि बाल अनाथालय में बच्चियों के नाम पर लोगों को लूटा जाता है। बच्चियों के आयीं रजाई और कंबलों को बेच दिया जाता है। जो बच्चियां इसके खिलाफ आवाज उठाती हैं, उन्हें इस कदर बदनाम कर दिया जाता है  कि वह न तो मर सकती है और न जी सकती हैं। आरोप है कि जो लड़कियां इनसे मिलकर चलती हैं, संचालक उन पर कभी आंच नहीं आने देते, क्योंकि मुसीबत आने पर ये उन्हीं का फायदा उठाते हैं। ये लोग किसी भी हद तक जा सकते हैं।

इस बारे में बच्चियों से बात की गई तो उन्होंने अलग-अलग बातें कहीं...

मिल रहीं सभी सुविधाएं
दसवीं कक्षा की छात्रा राधिका ने कहा कि वह बचपन से यहां रह रही हैं। यहां उन्हें माता-पिता जैसा प्यार मिला। उन्हें सभी जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं। वह यहां से नहीं जाना चाहती।

माता-पिता का प्यार इन्हीं से मिला
सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली ईशा ने कहा कि उसे माता-पिता का प्यार आश्रम में ही मिला है। यदि मेरे माता-पिता भी होते तो शायद ही इतना प्यार करते, जितना यहां मिलता है। वे यहां से नहीं जाना चाहती।

जबरदस्ती भेज रहे हैं अधिकारी
छठी कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा टिकली ने कहा कि आश्रम में रहने वाली सभी बच्चियों को शिफ्ट करने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन एक बार भी हमसे किसी ने पूछा ही नहीं कि हम क्या चाहती हैं। अधिकारी हमें जबरदस्ती यहां से भेज रहे हैं, हम जाना नहीं चाहती।

हम नहीं, लाशें होगी शिफ्ट
आश्रम में रहने वाली संजना ने उग्र स्वभाव से कहा कि अधिकारियों की जबरदस्ती को वे सहन नहीं करेंगी। आश्रम से उन्हें नहीं उनकी लाशों को शिफ्ट किया जाएगा। हमारी मां भी यही हैं और बाप भी। ये जहां रहेेंगे, हम भी वहीं रहेंगी।

एक बच्ची की चिट्ठी ने खोले सारे राज
अनाथालय प्रबंधन के सब दावों की एक छात्रा की चिट्ठी ने पोल खोल दी है। छात्रा की लिखी चिट्ठी प्रशासन के पास भी पहुंच गई है। छात्रा ने बताया कि वह अब अपने घर जाना चाहती है। उसको यहां पर कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा। यहां पर बच्चों के नाम पर लोगों को लूटा जा रहा है। उनको मिले नए सामान को वापस ले लिया जाता है। इसकी जगह उन्हें पुराना सामान उपयोग करने के लिए िदिया जाता है। अनाथालय में कंबल और रजाइयों को बेच दिया जाता है। बच्चे उनके खिलाफ जाते हैं, तो उनको बदनाम करने तक की कोशिश की जाती है। वह इन बातों से न तो मर सकता है और न ही जी पाता है। उन पर गलत-गलत आरोप लगाए जाते हैं। ये लोग बहुत ही गंदे हैं, अपने फायदे के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और किसी को भी बर्बाद कर सकते हैं।

सभी दस्तावेज मौजूद
बाल अनाथालय के प्रधान अमरजीत नरवाल ने कहा कि 1999 में बाल अनाथालय शुरू किया गया था। उसकी जिंदगी बाल अनाथालय से शुरू हुई थी और यहीं खत्म होगी। 15 साल में उन्हें एक बार 11 लाख की ग्रांट मिली थी। इसे अनाथालय में रहने वाले बच्चों पर ही खर्च किया गया था। उसके सभी दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। नरवाल का आरोप है कि ग्रांट आने के बाद दो अधिकारियों ने दस प्रतिशत तक कमीशन मांगा था। उन्होंने कमीशन देने से इनकार कर दिया। इस वजह से बाल अनाथालय के बच्चों को शिफ्ट किया जा रहा है। नरवाल ने कहा कि यदि बाल अनाथालय के बच्चों को शिफ्ट कर दिया गया तो वे ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मुहिम छेड़ेंगे और उनको कुर्सी पर नहीं रहने देंगे।

शोंधापुर स्थित बाल अनाथालय के रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाई गई थी। अनाथालय प्रधान को रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के लिए छह माह का समय दिया था। निर्धारित समय में भी वह रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद बाल अनाथालय में रहने वाले बच्चों को शिफ्ट करने और अनाथालय को बंद करने के आदेश दिए थे। बुधवार को अनाथालय प्रधान अमरजीत नरवाल बच्चियों समेत आए थे। वीरवार को रिकॉर्ड प्रस्तुत करने की बात कही। उन्हें एक दिन का समय देते हुए मामले की जांच एसडीएम को सौंप दी है।
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डॉ. चंद्रशेखर खरे, उपायुक्त, पानीपत।
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