-सरकारी एजेंसियों के ढुलमुल रवैये से किसान व आढ़ती परेशान, किसानों का दावा बारिश से खेतों में 30 प्रतिशत तक नुकसान, विभाग ने 10 प्रतिशत तक माना
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिले की अनाज मंडियों में इन दिनों धान की आवक और खरीद प्रक्रिया जोरों पर चल रही है, लेकिन एजेंसियों द्वारा धान के धीमे उठान और भुगतान में बरती जा रही सुस्ती से किसानों व आढ़तियों की परेशानी बढ़ गई है। जिले की मंडियों में अब तक 1.35 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की आवक हुई है। सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान का अब तक महज 10.80 प्रतिशत ही उठान हो पाया है, जबकि उठान के एवज में देय 2.02 करोड़ रुपये के भुगतान में से केवल 23.15 लाख रुपये (11.42 प्रतिशत) ही जारी किए जा सके हैं।
जिले की मंडियों में अब तक 1,35,742 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। इसमें 1,25,843 मीट्रिक टन 1509 किस्म और 9,899 मीट्रिक टन पीआर किस्म शामिल है। इसमें से 1,33,370.2 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। निजी राइस मिलर्स ने 1,25,678 मीट्रिक टन धान खरीदा है, जबकि सरकारी एजेंसियों (हैफेड व एचडब्ल्यूसी) ने 7,692.2 मीट्रिक टन की खरीद की है।
समालखा मंडी में सबसे अधिक 75,697 मीट्रिक टन धान आया। इसके अलावा पानीपत मुख्य मंडी में 24,078 मीट्रिक टन, मतलौडा में 12,378 मीट्रिक टन, इसराना में 11,012 मीट्रिक टन, बाबरपुर में 7,753 मीट्रिक टन और बापौली में 4,824 मीट्रिक टन आवक दर्ज की गई। बबैल और सनौली मंडियों में फिलहाल आवक शून्य है। बाजार में पीआर धान 2,441 रुपये से 2,461 रुपये तथा 1509 किस्म 4,051 रुपये से 4,201 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है।
सरकारी उठान में सुस्ती, मंडियों में अटका 6,861 मीट्रिक टन धान
मंडियों में सबसे बड़ी समस्या सरकारी धान के उठान की बनी हुई है। एजेंसियों ने 7,692.2 मीट्रिक टन धान खरीदा, लेकिन मात्र 830.48 मीट्रिक टन (10.80 प्रतिशत) ही उठाया जा सका है। फिलहाल 6,861.72 मीट्रिक टन सरकारी धान खुले में रखा हुआ है। पानीपत मंडी में एचडब्ल्यूसी ने 1,377.5 मीट्रिक टन खरीद के मुकाबले मात्र 184.5 मीट्रिक टन उठाया है। मतलौडा मंडी में एचडब्ल्यूसी ने 2,829 मीट्रिक टन में से महज 34.1 मीट्रिक टन का उठान किया। इसराना मंडी में हैफेड ने 1,285.8 मीट्रिक टन में से 264 मीट्रिक टन और बाबरपुर मंडी में एचडब्ल्यूसी ने 1,106.5 मीट्रिक टन खरीदकर 307.5 मीट्रिक टन का उठान किया है। बापौली मंडी में हैफेड ने 650.1 मीट्रिक टन खरीदकर केवल 40.38 मीट्रिक टन उठाया है।
भुगतान का बुरा हाल: 1.80 करोड़ की अदायगी अभी भी बकाया
उठान में देरी से किसानों का भुगतान अटक गया है। उठान के आधार पर एजेंसियों पर कुल 2.02 करोड़ का भुगतान देय बनता है। अब तक मात्र 23.14 लाख रुपये का भुगतान किया है। जिले में अभी भी 1.79 करोड़ का भुगतान बकाया है। हैफेड ने अपने देय में से 23.14 लाख (31.16 प्रतिशत) का भुगतान किया है। एचडब्ल्यूसी ने अपने देय 1.28 करोड़ में से अब तक कोई भुगतान नहीं किया है।
किसानों की जुबानी: फसल नुकसान के बाद अब मंडी में मार
बेमौसमी बारिश के चलते किसानों का दर्द गहरा गया है। कवी गांव के किसान रमेश ने बताया कि हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से उनकी खेत में खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई। इससे 25 से 30 प्रतिशत तक का भारी नुकसान हुआ है। अब मंडी में फसल लाने के बाद कई-कई दिनों तक उठान न होने से जगह नहीं बची है और भुगतान अटका हुआ है। इसराना के किसान दीपक ने कहा कि सरकारी खरीद तो हो रही है, लेकिन एजेंसियां न तो धान उठा रही हैं और न ही पैसे दे रही हैं। रबी की अगली फसल की बोआई के लिए खाद-बीज खरीदने के पैसे न होने से किसान भारी तंगी महसूस कर रहे हैं।
कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. देवेंद्र कुहाड़ ने बताया कि बारिश से फसल में औसतन 10 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। किसानों को इसमें सावधानी बरतने की जरूरत है। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि कि एजेंसियों को शीघ्र उठान और भुगतान के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
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कवी गांव के खेतों में बिछी धान। संवाद