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खतरा सामने पर ऑक्सीजन प्लांट का ट्रायल तक नहीं

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पानीपत। सिविल अस्पताल स्थित ऑक्सीजन प्लांट। - फोटो : Panipat
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पानीपत। फरवरी में कोरोना की संभावित तीसरी लहर यदि आई तो ऑक्सीजन की कमी फिर जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है। दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की किल्लत को देखते हुए सिविल अस्पताल में बने ऑक्सीजन प्लांट का आज तक ट्रायल तक नहीं हो सका है। आनन-फानन इसका उद्घाटन तो कर दिया गया, लेकिन बगैर ट्रायल इसे शुरू नहीं किया जा सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जा रहा पुख्ता तैयारी का दावा हवाई लगता है।
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पहली और दूसरी लहर के डेल्टा वैरिएंट से छह गुना तेजी से संक्रमित करने वाले ओमिक्रॉन का खतरा मंडरा रहा है। जनवरी तक ओमिक्रॉन वैरिएंट के तीसरी लहर में तब्दील होने की आशंका जताई जा रही है। यूके से लौटी युवती और उसके पिता में ओमिक्रॉन की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। ऐसे में फरवरी में इसका चरम भी हो सकता है। राहत की बात यह है कि फिलहाल दोनों निगेटिव हो गए हैं।
दूसरी लहर के दौरान भविष्य में ऐसी समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की मदद से सिविल अस्पताल में एक हजार लीटर क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण कराया। अगस्त में ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण पूरा हो गया। फिर ऑक्सीजन शुद्धता की जांच लटकी रही। किसी तरह प्लांट में बन रही ऑक्सीजन शुद्धता की जांच गुरुग्राम लैब में पूरी हुई तो ट्रायल लटक गया। करीब दो महीने पहले आनन-फानन शहरी विधायक प्रमोद विज ने बगैर ट्रायल ही ऑक्सीजन प्लांट का उद्घाटन कर दिया, लेकिन ट्रायल न होने की वजह से इसे शुरू नहीं किया जा सका।
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नहीं आ रहे एल एंड टी से इंजीनियर, तीन बार भेजा जा चुका लिखित रिमाइंडर
ऑक्सीजन प्लांट का ट्रायल एल एंड टी के इंजीनियरों की मौजूदगी में होना है, लेकिन वे आ ही नहीं रहे हैं। जिसकी वजह से ट्रायल लटका है। बीते दो महीने से एलएंडटी के इंजीनियर ट्रायल के लिए महज एक दिन का वक्त नहीं दे पा रहे हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग तीन बार लिखित रिमाइंडर भेज चुका है। इनता ही नहीं फोन पर कई बार मौखिक बात हो रही है।
ट्रायल रन के लिए ऑक्सीजन के 50 बड़े सिलिंडर रिफिल करा इंतजार जारी
ट्रायल रन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न आए, इसलिए अस्पताल प्रशासन ने बैकअप के तौर पर सात क्यूबिक मीटर के 50 बड़े ऑक्सीजन सिलिंडर रिफिल करा लिए है। प्लांट से निकलने वाली ऑक्सीजन का सेचुरेशन स्तर दो बार जांचा गया, पहले 93 एवं दूसरी बार में 96 मिला है। ऑक्सीजन गुणवत्ता की जांच हो चुकी है। प्लांट की लाइन को अस्पताल के बेड तक जा रही सेंट्रल लाइन से भी जोड़ा जा चुका है।
प्लांट से एक मिनट में एक हजार लीटर ऑक्सीजन मिलेगी
अगर प्लांट शुरू हो जाता तो एक मिनट में एक हजार लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन होता। इसके जरिए 150 बेड पर 24 घंटे आपूर्ति की जा सकती है। प्लांट शुरू होने से सिविल अस्पताल प्रबंधन को हर महीने 50 हजार रुपये की बचत भी होगी।
कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। जल्द प्लांट का ट्रायल भी होगा। इसके लिए लगातार संपर्क में हैं। - डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन
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