पानीपत। कोरोना वायरस से जीवन की सांस फूल रही है। रोगी ऑक्सीजन की किल्लत से जूझ रहे हैं। अप्रैल में जिले में 18 लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी से होने की चर्चा है। 9 लोगों की मौत समय पर वेंटिलेटर न मिलने से होने का उनके परिजनों ने आरोप लगाया है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने में कोरोना की इस दूसरी लहर में स्वास्थ्य विभाग भी बेबस नजर आ रहा है। जिले की जनसंख्या के मुताबिक देखें तो 41176 लोगों पर एक वेंटिलेटर और 10687 लोगों पर एक आईसीयू बेड व 2805 लोगों पर एक ऑक्सीजन बेड है।
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में महज 11 वेंटिलेटर हैं। इनमें से अब तक छह तो चालू भी नहीं हुए हैं। वहीं शिवपुरी श्मशान घाट में लाशों के ढेर लग चुके हैं। मृतकों के परिजनों को 12 से 13 घंटे तक अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
दूसरी ओर 12 निजी अस्पतालों को अब कोविड के मरीजों का इलाज करने की परमिशन मिली है। जिले में 499 ऑक्सीजन बेड, 131 आईसीयू बेड व मात्र 34 वेंटिलेटर की व्यवस्था है। हर रोज सरकारी व निजी अस्पतालों में औसतन 15 लोगों की मौत हो रही है। इनमें से 5-7 रोगी दिल्ली, गाजियाबाद व नोएडा से हैं। अप्रैल माह में दिल्ली, गाजियाबाद व नोएडा के 75 लोगों की पानीपत के अस्पतालों में मौत हुई है। ये आंकड़े सरकार की व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़े करते हैं।
दो फिजिशियन मिले, एक ने दूसरे शहर में कराया तबादला
सरकार ने एक सप्ताह पहले पानीपत को दो फिजिशियन एक माह की डेपुटेशन पर दि थे। डॉ. नीतिन गर्ग ने ड्यूटी ज्वाइन कर ली, लेकिन दूसरे फिजिशियन डॉ. अश्वनी भटनागर ने अपना तबादला कुरुक्षेत्र करवा लिया है। जो एक फिजिशियन मिला है, उन पर सभी 9 वेंटिलेटर इंस्टॉल करने का जिम्मा मिला है।
शवों के अंतिम संस्कार में हर रोज खर्च हो रही 5 हजार किलोग्राम लकड़ी
हर रोज शिवपुरी में शवों के अंतिम संस्कार में 5 हजार किलोग्राम लकड़ी औसतन खर्च हो रही है। शिवपुरी के भरे हुए लकड़ी के गोदाम खाली हो चुके हैं। अब जन सेवा दल लकड़ियों के लिए सामाजिक संस्थाओं पर निर्भर है।
अपने भी मोड़ रहे अपनों की अस्थियों से मुंह
अब तक शिवपुरी में कोविड गाइडलाइन के अनुसार 370 लोगों के अंतिम संस्कार हो चुके हैं। इनमें से 90 लोग दूसरे जिलों के थे। अब हर रोज 15 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार हो रहा है। तीन दिन में 71 शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है। मृतकों के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए 12-12 घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। 20 मृतकों के परिजनों ने अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों को प्रवाह करने की जिम्मेदारी जन सेवा दल को ही सौंप दी।