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एक थप्पड़ से बेहाश हुआ तो पांच बच्चे जान बचाकर भागे, दो को बाइक से पकड़कर लाए, केमिकल युक्त वाटर टैंक में डूबोकर तीन की हत्या, र

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गांव बिंझौल में पतंग के लिए धागा लेने गए छह किशोरों को डाई फैक्टरी में मौजूद महिला ने बुलाया था। परिजनों ने आरोप लगाया कि फैक्टरी मालिक हरिओम ने पहले वंश (10) को थप्पड़ मारा, जिससे वह बेहोश हो गया। बाकी पांच बच्चे उनके चंगुल से भाग निकले। इनमें से तीन किशोर खेतों से होकर भागे, जबकि अरुण (12) और लक्ष्य (11) सड़क से भागे। फैक्टरी में मौजूद कुछ लोगों ने बाइक से पीछा कर लक्ष्य और अरुण को पकड़ लिया और फैक्टरी ले आए। तीनों को केमिकल वाटर टैंक में डुबोकर फैक्टरी मालिक ने हत्या की। बाद में शव कपड़े में लपेटकर रजवाहे में फेंक दिए। इनके शव दिल्ली पैरलल नहर के नौ नंबर रजवाहे में मिले। तीनों बच्चों की मौत से गांव में मातम छा गया।
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नहरी एक्सईएन को कह पानी रुकवाया और किशोरों की तलाश हुई शुरू
तीन बच्चों के घर पहुंचने पर अरुण, वंश और लक्ष्य के परिजन फैक्टरी पहुंचे, लेकिन देर रात तक फैक्टरी मालिक यही कहता रहा कि बच्चे उनके पास नहीं है। परिजनों ने आठ मरला चौकी में शिकायत दी। देर रात फिर से परिजन ब्लीच एवं डाई हाउस पहुंचे। उनका आरोप है कि वहां काम मौजूद महिला, जिसका नाम सुभीला है, उसने उन्हें धमकाया और बताया कि मालिक ने बच्चों की हत्या कर शव रजवाहे में फेंक दिए हैं। रात दो बजे नहरी विभाग के एक्सइएन को फोन कर पानी रुकवाया और तलाश शुरू की। सुबह चार बजे अरुण और वंश का शव ब्लीच हाउस की पीछे रजवाहे में मिले और लक्ष्य का शव करीब 200 मीटर दूर मिला।
गोहाना रोड किया जाम, सामान्य अस्पताल में दिया करीब छह घंटे धरना
परिजनों तीनों बच्चों के शव लेकर पहले गोहाना रोड पहुुंचे और शव रखकर रोड पर रखकर जाम लगा दिया। मॉडल टाउन थाना प्रभारी व एरिया डीएसपी संदीप मौके पर पहुंचे और परिजनों को कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। करीब 20 मिनट रोड जाम रहा। जिसके बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। इसके बाद करीब 400 लोग सामान्य अस्पताल पहुंचकर धरने पर बैठ गए। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। करीब छह घंटे तक धरने पर बैठे परिजन फैक्टरी मालिक समेत 12 लोगों पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद उठे। शाम चार बजे तीनों बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया। अस्पताल में भारी भीड़ होने पर डीएसपी वीरेंद्र, डीएसपी संदीप, डीएसपी महिला पूजा डाबला, शहर थाना प्रभारी योगेश कटारिया, मॉडल टाउन थाना प्रभारी सुनिल कुमार, महिला थाना डीएसपी किरण नैन, असंध नाका चौकी इंचार्ज अत्तर सिंह, किला थाना से एसआई राजेश अपनी भारी संख्या में पुलिस बल के साथ सामान्य अस्पताल पहुंचे और हालात पर काबू पाया।
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वंश दूसरी, लक्ष्य छठीं और अरुण पांचवीं में पढ़ते थे
लक्ष्य के पिता जय कुमार ने बताया कि वह छठीं में पढ़ता था। वह मजदूरी करते हैं और चार भाई-बहनों में लक्ष्य दूसरे नंबर की संतान था। घर से खेलने की बात कहकर निकला था। वंश के पिता अशोक ने बताया कि वह दूसरी कक्षा में पढ़ता था और वह भी मजदूरी करते हैं। वह घर से लक्ष्य के साथ जाने की बात कहकर निकला था। अरुण के पिता बिजेंद्र ने बताया कि वह फ्रूट की रेहड़ी लगाते हैं। अरुण बड़ा बेेटा था और पांचवीं में पढ़ता था।
12 दिन पहले ही सील किया गया था ब्लीच हाउस, फिर भी चल रहा था
प्रदूषण बोर्ड के एसडीओ प्रदीप मलिक ने 26 जून को छापेमारी कर बिंझौल गांव में अवैध चल रहे छह ब्लीच हाउस को सील किया था। दोबारा खोलने पर कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। जिसके बावजूद भी मालिक हरिओम ने अगले दिन ही ब्लीच हाउस शुरू कर दिया।
जान बचाकर भागे तीन बच्चों में दो की हुई काउंसलिंग, तीसरा डरकर बुआ के घर गया
सीडब्ल्यूसी अधिकारी डॉ. मुकेश आर्य ने बताया कि वह गांव बिंझौल में गया तो उन्हें 11 वर्षीय दो किशोर मिले। जबकि तीसरा किशोर अपनी बुआ के घर पर चला गया। पहले किशोर ने बताया कि दूसरा किशोर फैक्टरी के अंदर गया था, गेट पर खड़ी महिला ने उसे धागा देने के लिए बुलाया था। जिसके बाद वह सभी अंदर चले गए थे। जब धागा उठाने लगे तो एक व्यक्ति आया, जिसने वंश को थप्पड़ मारा, जिससे वह बेहोश हो गया। जिसके बाद वह वहां से भाग गए। लक्ष्य और अरुण सड़क पर थे और वह तीनों खेतों के अंदर से भागे। ब्लीच हाउस से करीब 200 मीटर दूर तक भागने पर पीछे मुड़कर देखा तो बाइक पर आए कुछ युवक लक्ष्य और अरुण को पकड़कर ले गए और वह घर आए गए। डॉ. मुकेश ने बताया कि बच्चों की अभी एक और काउंसलिंग होनी चाहिए, अभी वह डरे हुए है।
डॉक्टर के बोर्ड ने किया पोस्टमार्टम, डूबने से हुई तीनों की मौत, जबकि बच्चों को तैरना आता था
तीनो बच्चों की दो डॉक्टरों के बोर्ड ने पोस्टमार्टम किया। प्राथमिक जांच में बच्चों की डूबने से मौत हुई है। वहीं बच्चों के शरीर पर कोई निशान नहीं मिला। जबकि परिजनों का कहना है कि तीनों के शव को रजवाहे से निकाला गया था तो उनके मुंह से सफेद झाग निकल रहे थे। तीनों बच्चों को तैरना भी आता था।
पुलिस समय पर कार्रवाई करती तो बच जाते हमारे बच्चे
परिजनों ने आरोप लगाया कि अगर आठ मरला पुलिस चौकी ठीक समय पर कार्रवाई करती तो उनके तीनों मासूम बच्चे बच जाते। जब उन्होंने रजवाहे से शव निकाले और पुलिस को सूचना दी, उसके बाद पुलिस करीब दो घंटे देरी से पहुंची। ग्रामीणों ने आठ मरला पुलिस चौकी के एक एएसआई को मौके पर जमकर खरी-खोटी सुनाई।
परिजनों ने शिकायत के आधार पर ब्लीच हाउस के मालिक हरिओम गुप्ता व मैनेजर पवन बसंल के साथ ही ब्लीच हाउस की जमीन मालकिन व उसके बेटे अश्वनी और लेबर समेत 12 लोगों पर केस दर्ज किया है।
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- संदीप कुमार, डीएसपी
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