केंद्र के 500 और एक हजार के नोट बंद करने की घोषणा के एक माह बाद भी जिले में कैश की किल्लत समाप्त नहीं हुई। बैंकों और एटीएम के बाहर लगातार लंबी लाइन लगी हुई है। बैंकों में अब तक नो कैश है और एटीएम आउट ऑफ कैश हैं। एक माह में हाई प्रोफाइल लोगों को बेशक कैश को लेकर परेशानी नहीं हुई है, लेकिन गरीब लोगों की दिक्कत हर गुजरते दिन के बाद बढ़ती जा रही है। बैंक अधिकारी आरबीआई से कैश न आने और कैशलेस ट्रांजेक्शन की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर की शाम को पांच सौ और एक हजार के नोट बंद करने की घोषणा की थी। वीरवार को पूरा एक माह हो चुका है। अमर उजाला ने पैसों को लेकर बैंकों की स्थिति और लोगों की परेशानी जानी। ग्रामीण क्षेत्र ही नहीं शहरी क्षेत्र में स्थित बैंक और एटीएम की स्थिति चिंताजनक मिली। शहरी क्षेत्र में जीटी रोड स्थित किसी भी बैंक में कैश नहीं मिला। बैंकों के बाहर अल सुबह करीब छह बजे से लाइनों में लोग खड़े हो गए थे। बैंक खुलने के कुछ देर बाद ही अधिकारियों और कर्मचारियों ने नो कैश की बात कही, तो सभी खाली हाथ लौट आए। यही हाल एटीएम का रहा। शहर स्थित लगभग सभी बैंकों के एटीएम पर ताला लटका मिला। यहां से भी उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ा।
43 बैंक और 211 एटीएम सब खाली
जिले में सरकारी और प्राइवेट 43 बैंक और इनके 211 एटीएम हैं। यहां पर पहले दिन से ही कैश को लेकर दिक्कत रही है। वीरवार को भी कैश को लेकर स्थिति खराब रही। किसी भी बैंक या एटीएम पर कैश नहीं मिला। लोगों को सुबह ही अपने घर खाली हाथ लौटना पड़ा।
नोटबंदी के बाद शिकायतों का अंबार
नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा आरोप बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगे हैं। एलडीएम कार्यालय में नोटबंदी के बाद एक माह में बैंक अधिकारियों के खिलाफ करीब 150 शिकायत पहुंची हैं। इससे पहले माह में चार या पांच शिकायत ही आ पाती थीं। अब एक दिन में ही पांच से सात शिकायतें आ रही हैं। एलडीएम ने शिकायतों की संख्या बढ़ने पर अलग से काउंटर बनाकर एक कर्मचारी की ड्यूटी लगानी पड़ी। बैंक अधिकारियों कैश की जानकारी लेने के साथ शिकायतों के बारे में भी जवाब मांगा जा रहा है।
पहले एक्सचेंज, फिर जमा, अब कैशलेस
प्रधानमंत्री की नोटबंदी को लेकर की गई घोषणा के बाद पहले कैश एक्सचेंज को लेकर बैंकों में मारामारी रही। बैंकों और डाकघरों में लोग कैश एक्सचेंज कराने के लिए लाइन में लगे रहे। इसके बाद केवल जमा कराने के लिए परेशान हुए। अब कैशलेस ट्रांजेक्शन ने उपभोक्ताओं की पेशानी पर बल डाल दिए हैं।