कैथल। शहर की पॉश कॉलोनियों में से एक बड़ा कटहड़ा में 140 बच्चों के लिए
एक कमरे में चलाए जा रहे प्राथमिक स्कूल को शायद शिक्षा विभाग भूल ही गया
है।
यही कारण है कि इस स्कूल में एक कमरे के अलावा कोई जगह नहीं
है। बच्चे स्कूल के बाहर खुले में एक पेड़ के नीचे बैठते हैं तो ततैये
काटते हैं, वहीं आसपास अच्छी कॉलोनियां होने के कारण खुले में पेड़ के नीचे
बैठकर पढ़ते हुए बच्चे हीन भावना का भी शिकार हो रहे हैं, लेकिन विभाग के
किसी अधिकारी ने शायद ही कभी इस स्कूल का दौरा किया हुआ।
शहर के बीचों
बीच स्थित बड़ा कटहेड़ा स्थित प्राइमरी स्कूल केवल 65 गज जगह में चल रहा
है। इसमें विद्यार्थियों के लिए न तो कक्षाएं लगाने के लिए उचित जगह न ही
मिड-डे मील बनाने की स्कूल में व्यवस्था है।
स्कूल के अध्यापक
विद्यार्थियों को अनसेफ कमरे में बैठाकर कर पढ़ा रहे हैं। एक कमरे को ही
मल्टीपर्पज रूम के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। कहने को पांच
अध्यापिकाएं भी हैं, लेकिन इसी एक कमरे में स्टाफ रूम, कक्षाएं, मिड-डे
मील, मुख्य अध्यापक का कमरा शामिल है। इसके अलावा स्कूल में दूसरे कमरे को
विभाग द्वारा अनसेफ घोषित कर दिया गया है। मजबूरी के कारण विद्यार्थियों को
अनसेफ कमरे में बैठाना पड़ रहा है। इसके अलावा स्कूल के अंदर ही एक बचपन
शाला खुली हुई है। इसमें करीब 25 करीब एक से तीन साल तक के आते हैं। यह
स्कूल के बीच में स्थित है। इस स्कूल में गरीब परिवार के विद्यार्थी ही
शिक्षा ग्रहण करते के लिए आते हैं। स्कूल में असुविधाओं के कारण
विद्यार्थियों को हीन भावना का भी शिकार होना पड़ रहा है।
कुक घर पर तैयार करती है मिड डे मील
स्कूल
में मिड-डे मील बनाने के लिए जगह ने होने के कारण कुल अपने घर पर ही
मिड-डे मील तैयार करके बच्चों को देती है। इसके कारण अव्यवस्था का आलम है।
कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
स्कूल
में बच्चों को अनसेफ भवन में बैठाया जा रहा है। इस कारण कभी भी बड़ा हादसा
हो सकता है। जनस्वास्थ्य विभाग ने स्कूल के कमरे का अनसेफ घोषित किया है।
अगर इस कमरे में विद्यार्थियों बैठाया नहीं जाता है तो स्कूल से बाहर
विद्यार्थियों को कक्षाएं लगानी पड़ेगी।
बारिश में स्कूल की छत से गिरता है पानी
बारिश
के कारण पूरे स्कूल में छतों के दरारें आई हैं। इस कारण पानी छतों से
गिरना आरंभ हो जाता है। अध्यापकों ने बताया कि बारिश के मौसम में
विद्यार्थियों के लिए अधिक समस्या हो जाती है।
स्कूल के अंदर ही है खुली है बचपन शाला
स्कूल
के अंदर एक बचपन शाला भी है। इसमें करीब 25 विद्यार्थी एक वर्ष से तीन
वर्ष तक के आते हैं। स्कूल की नाजुक हालत के कारण नन्हे मुन्ने बच्चों के
भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।