संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। गांधी मंडी जैन स्थानक में धर्मशाला में शुक्रवार को गुरुदेव सुदर्शन लाल महाराज के शिष्य अरुण मुनि महाराज लोगों को कर्म का संदेश दिया।
उनके प्रवचन आत्मा, कर्म और प्रकृति के अटल न्याय के गहरे संबंध पर केंद्रित रहा। सच्चा धर्म बाहर नहीं भीतर है। अपने कर्मों की जवाबदेही में ही मोक्ष का द्वार है। कर्मों से भागा नहीं जा सकता वे छाया की तरह साथ चलते हैं। अरुण मुनि ने कहा कि जिस प्रकार कोई व्यक्ति पहाड़ पर खड़े होकर जोर से आवाज लगाता है तो उसकी वही आवाज प्रतिध्वनि बनकर वापस आती है।
उसी प्रकार हमारे किए गए कर्म भी प्रकृति में गूंजते हैं और समय आने पर कई गुना बनकर लौटते हैं।
प्रकृति न्याय करती है। वह पक्षपात नहीं करती है न देर। वह हर व्यक्ति को उसके किए कर्मों का फल देती है। चाहे वह मीठा हो या कड़वा।