-स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों को उपलब्ध कराए हैं 30 मरहम बॉक्स
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। टीबी के रोगियों की दवा पर नजर रखने के लिए अब कोई व्यक्ति या कागजी रिपोर्ट बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब इन पर मरहम बॉक्स नजर रखेगा। यदि एक बार की भी दवा छोड़ी तो नोडल अधिकारी तक संदेश पहुंच जाएगा। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम उक्त मरीज को उस समय की दवा देगी। ऐसा ही एक मामला मरहम बॉक्स ने मंगलवार को पकड़ा है।
समालखा की एक 32 वर्षीय महिला टीबी पॉजीटिव मिली है। उसका मरहम बॉक्स की देखरेख में 18 महीने तक इलाज चल रहा है। महिला ने मंगलवार सुबह दवा नहीं ली। मरहम बॉक्स पर इसकी सूचना जिला नोडल अधिकारी तक पहुंच गई। नोडल अधिकारी ने क्षेत्र के स्वास्थ्य कर्मचारी की ड्यूटी लगाई। स्वास्थ्य कर्मचारी ने घर पहुंचकर महिला को दवा के बारे अवगत कराया। इसके बाद मरीज ने स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार दवा ली।
एक मरहम बॉक्स की कीमत 22 हजार रुपये
स्वास्थ्य विभाग ने टीबी रोगियों पर नजर रखने के लिए 30 मरहम बॉक्स दिए हैं। एक मरहम बॉक्स की लागत लगभग 22 हजार रुपये है। मरहम बॉक्स टीबी रोगियों द्वारा समय पर दवा लेने की सूचना तुरंत को-ऑर्डिनेटर को देगा। यदि कोई मरीज दवा नहीं लेता है तो को-ऑर्डिनेटर उनसे संपर्क कर दवा के लिए कहेगा और दवा को जारी कराएगा। इससे बिगड़ी टीबी को नियंत्रित किया जा सकेगा। जुलाई माह में टीबी बलगम जांच के लिए नाॅट मशीन द्वारा 2135 और माइक्रोस्कॉप द्वारा 1664 सैंपल लिए गए। जिनमें से 503 टीबी पॉजीटिव मिले। मंगलवार को मरहम बॉक्स का पहला मरीज सामने आया है।
मरहम बॉक्स के फायदे-
- मरहम बॉक्स को एक मरीज ठीक होने के बाद दूसरे को दिया जा सकता है।
- मरहम बॉक्स को मोबाइल चार्जर से भी चार्ज किया जा सकता है।
- एक दिन चार्ज करने के बाद यह आठ से दस दिन तक चलता है।
- मरीज ने दवा ली या नहीं ली, इसकी सूचना तुरंत को-ऑर्डिनेटर को मिल जाएगी।
- बॉक्स के जरिये टीबी को बिगड़ने से रोका जा सकेगा।
वर्जन :
मरहम बॉक्स से टीबी को नियंत्रित किया जा सकेगा। इसे एक मरीज के बाद दूसरे मरीज द्वारा प्रयोग किया जा सकता है। मरहम बॉक्स से अब जिले को 2030 तक टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकेगा। मंगलवार को एक मामला मरहम बॉक्स की मदद से पकड़ा है। उनके घर स्टाफ भेजकर दवा दिलवाई है।
- डॉ. लाभ सिंह, टीबी नोडल अधिकारी पानीपत