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Panipat News: स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं नर्सिंग ऑफिसर, झेलती हैं उपेक्षा

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पानीपत। स्वास्थ्य विभाग की चिकित्सा सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाली नर्सिंग ऑफिसर सालों से लोगों को नया जीवन दे रही हैं लेकिन इन्हें इसका उतना श्रेय कभी नहीं किया गया, जितना दिया जाना चाहिए। अस्पताल पहुंचने पर मरीज के पास सबसे पहले नर्सिंग ऑफिसर पहुंचती है। यहीं इनकी स्थिति को प्राथमिक उपचार देने के बाद डॉक्टरों को सूचित करती हैं। डॉक्टरों के साथ हर स्थिति में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहती हैं। यहां तक मरीजों की यह ऐसे देखभाल करती हैं जैसे वह उनके परिवार की ही सदस्य हो।
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मरीजों को अपनापन महसूस करवाना ही इनकी सबसे बड़ी खूबी है। स्वास्थ्य विभाग की इमरजेंसी, प्रसूति, एसएनसीयू वार्ड, बर्न वार्ड, ट्रामा सेंटर, ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू समेत तमाम महत्वपूर्ण विभागों की कमान इन्हीं के हाथों में रहती हैं, लेकिन उन्होंने बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का उतना श्रेय नहीं दिया जाता जितना डॉक्टरों को मिलता है। नर्सिंग ऑफिसर के जहन में यह मलाल हमेशा रहता है। इस साल विश्व नर्सिंग दिवस हमारे भविष्य, देखभाल की आर्थिक शक्ति की थीम पर मनाया जा रहा है।

जिले के सरकारी अस्पताल में 103 नर्सिंग ऑफिसर हैं। 20 नर्सिंग ऑफिसर के पद खाली हैं। जिले के सभी सरकारी केंद्रों में कुल 195 नर्सिंग ऑफिसर हैं। अगर निजी अस्पतालों को भी इसमें जोड़ लें तो यह डाटा 1500 से अधिक है। इन नर्सिंग ऑफिसर ने कोरोना काल में खुद को साबित किया था। इन्होंने हजारों लोगों की जान भी बचाई। दो नर्सिंग ऑफिसर की कोरोना काल में जान भी चली गई थी। कई कई बार कोरोना संक्रमित होने के बाद भी यह ठीक होकर वापस लौटी और हजारों लोगों का जीवन बचाया। सरकार ने भी इनको कोरोना कॉल में बेहतरीन काम का तोहफा दिया। इनको नर्स से नर्सिंग ऑफिसर का पद दिया गया।
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बॉक्स


निजी नर्सिंग ऑफिसर को नहीं मिल पाता उचित वेतन-

सरकारी नर्सिंग ऑफिसर की वित्तीय स्थिति निजी नर्सिंग ऑफिसर से कहीं बेहतर होती है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में नर्सिंग ऑफिसर का वेतन 50-70 हजार प्रतिमाह के बीच है, जबकि निजी अस्पतालों में इन्हें महज 15-20 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। ड्यूटी भी आठ घंटे की होती है जबकि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में छह घंटे की ड्यूटी होती है।


वर्जन-

नर्सिंग ऑफिसर पर हमेशा संक्रमण की चपेट में आने का खतरा रहता है। सबसे पहले ही नर्सिंग ऑफिसर ही मरीज के संपर्क में आते हैं। नर्सिंग ऑफिसर को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का उतना श्रेय नहीं मिलता जितना मिलना चाहिए। नर्सिंग ऑफिसर स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ है। सरकार को नर्सिंग ऑफिसर के हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।
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सुमन पोरिया, अध्यक्षा जिला नर्सिंग एसोसिएशन , पानीपत।
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