पानीपत। मां पहली गुरु होती है। शास्त्रों और किताबों में भी मां की महिमा का गुणगान किया गया है। वह आज भी अपनी जिम्मेदारी पर खरी उतर रही हैं। वह चाहे समाज हो या फिर देश की सुरक्षा। यहां पर अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ अपने घर और परिवार के साथ खड़ी होती हैं। उसके लिए उसके परिवार की खुशी सबसे बड़ी है। वह इसके लिए दिन रात मेहनत करती हैं।
मां की जिम्मेदारी और उनके मातृत्व को दर्शाती बातें शनिवार को अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा आयोजित अपराजिता में सामने आया। मदर्स डे के उपलक्ष्य में मॉडल टाउन में आयोजित अपराजिता में मुख्य वक्ता शिक्षाविद शिल्पा परुथी रहीं। उन्होंने बच्चों और युवा पीढ़ी को मां के बारे में विस्तार से बताया। कार्यक्रम में करीब 70 बच्चे शामिल रहे। शिल्पा परुथी ने कहा कि मां अपने बच्चे को नौ महीने पेट में पालती है और फिर उसको जन्म देती है। इस दौरान गंभीर प्रसव पीड़ा का सामना करना पड़ता है। वह अपने दूध पिलाकर बच्चे को बड़ा करती है। कहा भी गया है कि कोई व्यक्ति अपनी चमड़ी की जूती बनवाकर अपनी मां को पहना दे तो भी उसका कर्ज नहीं उतार सकता।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी मां का आदर करना चाहिए। वे अपनी मां का आशीर्वाद पाकर शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में खुद को साबित कर सकता है। पलक सहगल ने कहा कि मां शब्द अपने आप में पर्याप्त है। इसमें हमदर्दी और प्यार झलकता है। इस दुनिया में एक मां ही है जो कभी अपने बच्चों को दुखी नहीं देख सकती। वह हर समय अपने बच्चों की खुशहाली की कामना करती है। सिमरन ने कहा कि मां केवल मदर्स डे तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हर रोज मनाना चाहिए। एक व्यक्ति अपनी मां को जितना सम्मान देता है, वह उसके लिए उतना ही कम है। हमें हर पल अपनी मां को याद रखना चाहिए।
अंजलि ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपने अधिकारों की बातें करने लग जाती है। कई बार देखने में आया है कि वह छोटे से फायदे के लिए अपनी मां को भी भला बुरा तक कह देते हैं। इससे समाज का ताना बाना बिगड़ रहा है। हमें इसको सुधारना होगा। इस मौके पर क्रिस्टी, रितु, काजल, आशा, मोनिका, श्रेया, मुस्कान व मनीषा मौजूद रही।