पानीपत। जनस्वास्थ्य विभाग बापौली में दो एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाएगा। जिससे यहां की दस हजार से ज्यादा आबादी को गंदे पानी की निकासी से राहत मिलेगी। यहां पहले से सीवर लाइन बिछा दी गई है। इनकी मुख्य लाइन को एसटीपी से जोड़ा जाएगा और गंदे पानी को शोधित किया जाएगा। इस शोधित पानी को दोबारा फिर से इस्तेमाल के लिए खेती बाड़ी में प्रयोग के लिए किसानों को दिया जाएगा। इसका 4.11 करोड़ रुपये की निविदा भी लगाई गई है।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के एक्सईएन संजीव शर्मा ने बताया कि कि सरकार की महाग्राम योजना के तहत इस एसटीपी बनाया जाएगा। चूंकि बापौली की आबादी दस हजार से ज्यादा हो चुकी है। इसलिए योजना के अनुसार इसे महाग्राम माना गया है। यहां पहले चरण में सीवर लाइन बिछाई गई है। इसकी क्षमता के अनुसार दो एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा।
एसबीआर तकनीक का होगा प्रयोग:
इस प्रोजेक्ट में सिक्वेंशनल बैच रिएक्टर (एबीआर) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक में पानी के फ्लो से शोधित करने की गुणवत्ता क्षमता बेहतर बनती है। एक साल के संचालन और रखरखाव का जिम्मा भी एजेंसी का ही रहेगा। तीन माह के सफलतापूर्वक संचालन के बाद पांच साल तक इसका रखरखाव एजेंसी ही करेगी।
एक्सईएन संजीव शर्मा ने बताया कि महाग्राम योजना के तहत जिले के गांव ददलाना और चुलकाना में भी एसटीपी का प्रोजेक्ट चल रहा है। वहीं गांव राणा माजरा में प्रोजेक्ट तैयार हो चुका है।
ये होगा फायदा:
एक्सईएन संजीव शर्मा ने बताया कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का शोधित पानी सबसे उत्तम खेती बाड़ी के लिए होता है। इसमें 50 से 70 प्रतिशत तक की यूरिया की मात्रा बताई जाती है। जो खेती के लिए उपयोगी साबित होती है। इससे पानी के साथ किसानों यूरिया की भी बचत होगी। वहीं खेती में फिलहाल इस्तेमाल किए जाने वाले भूजल की भी बचत होगी और गांव के लोगों को गंदे पानी की निकासी से राहत मिलेगी ।