पानीपत। निजी अस्पतालों की प्रसव सेवाओं पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। निजी अस्पतालों में हुई 51 प्रतिशत सिजेरियन डिलीवरी के मामले की जांच शुरू हो चुकी है। सिविल सर्जन ने जिले के लगभग 30 निजी अस्पतालों को नोटिस जारी कर सिजेरियन डिलीवरी का कारण पूछा है। सिविल सर्जन इस मामले में डिप्टी सिविल सर्जन के नेतृत्व एक कमेटी का गठन कर रहे हैं , कमेटी जांचेंगी कि किन प्रसव के मामलों में सर्जरी जरूरी थी। अगर निजी अस्पतालों का जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो इन पर कार्रवाई की जाएगी।
जिले के लगभग 30 निजी अस्पतालों में 2023 में 51 प्रतिशत बच्चों ने सर्जरी से जन्म लिया है। 15 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में महज 13 प्रतिशत सिजेरियन डिलीवरी हुई है। निजी अस्पतालों में हर दूसरी डिलीवरी सर्जरी से हो रही है। ये आंकड़े निजी अस्पतालों के डॉक्टरों की नीयत पर सवाल खड़ा कर रहा है। निजी अस्पतालों के डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी के 40-50 हजार रुपये लेते हैं। सामान्य डिलीवरी के 10-20 हजार रुपये लेते हैं। निजी अस्पतालों के डॉक्टरों पर आरोप है कि वो कमाई के लालच में सामान्य की बजाय सिजेरियन डिलीवरी को प्राथमिकताएं देते हैं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में निशुल्क डिलीवरी होती है। इसलिए यहां डॉक्टर सामान्य डिलीवरी का प्रयास करते हैं।
2023 में अप्रैल से दिसंबर तक जिले में कुल 20187 डिलीवरी हुई। इनमें 12527 सरकारी व 7661 डिलीवरी निजी अस्पतालों में हुई। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में 13 प्रतिशत यानि महज 1625 डिलीवरी सर्जरी से हुई है। निजी अस्पतालों में 3915 डिलीवरी सर्जरी से हुई है।
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निजी अस्पताल के एजेंटों का फैला जाल
निजी अस्पतालों का शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में पूरा जाल फैला है। कॉलोनियों व गांवों में बैठे झोलाछाप डॉक्टरों को अस्पतालों ने अपना एजेंट बनाया है। अस्पतालों में मरीज भेजने पर इन्हें कमीशन दिया जाता है। ये एजेंट लोगों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की कमी गिनवाते हैं। लोगों को कमीशन के लालच में निजी अस्पतालों में जाने के लिए बरगलाते हैं।
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सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों से रेफरल एक प्रतिशत से भी कम
जिले के 15 स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव संपन्न कराया जाता है। नागरिक अस्पताल व समालखा अस्पताल में सर्जरी से भी डिलीवरी की सुविधा है। पानीपत से अब गर्भवतियों का रेफरल एक प्रतिशत से भी कम है।
वर्जन :
निजी अस्पतालों में 51 प्रतिशत सिजेरियन डिलीवरी हुई है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में ये प्रतिशत महज 13 प्रतिशत है। ये जांच का विषय है। इसकी गंभीरता से जांच की जाएगी। सभी निजी अस्पतालों को इस संंबंध में नोटिस जारी कर दिया गया। अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो कार्रवाई निश्चित तौर पर की जाएगी। कमेटी का भी गठन किया जा रहा है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं बढ़ाई जा रही है।
डॉ. जयंत आहूजा, जिला सिविल सर्जन