अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। नोटबंदी के बाद सरकारी विभागों में दी गई पुराने नोटों में बकाया राशि जमा करवाने की अनुमति के बाद विभागों को खूब फायदा मिला है। अकेले बिजली विभाग में 7 करोड़ 53 लाख रुपये पुरानी करेंसी के रूप में बकाया जमा हुआ है। वहीं नगर परिषद में भी 80 लाख से अधिक प्रॉपर्टी टैक्स जमा हुआ है।
सरकार द्वारा 500 व 1000 के नोटबंदी के फैसले के बाद सरकारी विभागों में बकाया राशि पुराने नोटों के रूप में जमा करवाने की अनुमति दी गई थी। जिसके चलते 9 नवंबर से ही सरकारी विभागों में इसके लिए लाइनें लगनी शुरू हो गई थी। सरकारी विभागों में सबसे अधिक बिजली बिलों की अदायगी बिजली विभागों में जमा हुई। यहां 8 नवंबर से लेकर 15 दिसंबर तक लोग केवल पुराने 500 के नोट ही लेकर आए। हालांकि बिजली विभाग द्वारा बिजली बिलों की जुर्माना माफी योजना को शुरू की गई। लेकिन उसके बाद तो पुराने नोटों की आदायगी पहले से दोगुनी हो गई।
एसई आरके तेवतिया ने बताया कि नोटबंदी के दौरान बिजली विभाग में 10 नवंबर से 15 दिसंबर तक पुराने नोट जमा किए गए। जिसमें कुल 7 करोड़ 53 लाख 95 हजार 500 रुपये की पुरानी करेंसी जमा हुई। जिसमें 25 नवंबर तक एक करोड़ 86 लाख रुपये की राशि विभाग के डिफाल्टर हो चुके उपभोक्ताओं ने जमा करवाई। इसके बाद विभाग की ओर से जुर्माना माफी योजना को शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि नोटबंदी के बाद विभाग में 500 के 25 हजार 9 सौ पांच और 1000 के कुल 62 हजार 43 नोट आए। जिन्हें उपभोक्ताओं ने जमा करवाया
चेक से बिल की अदायगी 50 प्रतिशत घटी
पुराने नोटों के सरकारी विभागों में प्रचलन के दौरान सभी लोग केवल पुराने नोटों को खपाने में लगे रहे। इस दौरान लोगों ने बिजली विभाग को चेक से भुगतान किये जाने वाले बिलों में भारी गिरावट आई। करीब 50 प्रतिशत चेक से भुगतान में कमी आई।
नगर परिषद भी नहीं रहा टैक्स की वसूली में पीछे
बेशक सरकार के नोटबंदी के फरमान से लोगों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। लेकिन 15 दिसंबर तक पुरानी करेंसी के सरकारी विभागों में प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली में नगर परिषद भी पीछे नहीं रहा है। यहां भी लोगों ने अपने हाउस टैक्स और नगर परिषद की दुकानों के अटके किरायों को भारी भरकम राशि में जमा करवाया है।
नोटबंदी के दौरान कुल एक करोड़ की राशि जमा हुई है। जिसमें से 80 लाख रुपये पुराने पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटों के रूप में जमा हुई है।
एमएस जगत, एमई