पानीपत के रेलवे स्टेशन स्थित डिस्पेंसरी में नियमित डॉक्टर नहीं होने के कारण रेल अधिकारियों और कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बीमार होने पर या अन्य हादसा होने पर रेल कर्मचारियों को अन्य निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
सबसे ज्यादा परेशानी सेवानिवृत्त हो चुके वृद्ध कर्मचारी और अधिकारियों को होती है। कर्मचारी कई बार नियमित डॉक्टर की मांग कर चुके हैं, लेकिन कर्मचारियों को सांत्वना के कुछ भी नहीं मिल पाया है। आलम यह है कि अस्पताल का ज्यादातर कार्य फार्मेसिस्ट के हवाले है।
नौ माह पहले किया था दावा
रेलवे आला अधिकारियों ने डिस्पेंसरी के लिए करीब नौ माह पहले नियमित डॉक्टर नियुक्त करने का दावा किया था। इतना समय बीत जाने के बाद भी यहां के लिए कोई नियमित डॉक्टर नहीं मिल पाया। कर्मचारियाें के अलावा वेंडराें के स्वास्थ्य की जांच का जिम्मा भी रेलवे डिस्पेंसरी पर है। वहीं अभी भी यह मालूम नहीं है कि कब तक डॉक्टर मिल पाएगा। इस समय मौसममें बदलाव होने के कारण ज्यादातर लोग बीमारियों का गिरफ्त में आ जातेे हैं। बीमारी शुरूआत खांसी और जुकाम से होती है। ऐसे में छोटी या बड़ी किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी पर मौके पर कोई डॉक्टर नहीं मिलता।
निजी अस्पतालों का लेते हैं सहारा
रेलवे कर्मचारियों को अपनी छोटी मोटी भी परेशानी होने पर निजी अस्पतालों में मोटी फीस चुकानी पड़ रही है। इससे महंगाई के दौर में कर्मचारियों और अधिकारियों को परेशानी हो रही है। रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारियों की माने तो कांट्रैक्ट बेस पर लगा डॉक्टर अपनी मर्जी से ही आता है। उस पर ज्यादा दबाव भी नहीं बनाया जा सकता। अगर ज्यादा दबाव बनाया जात है तो वह किसी भी समय अस्पताल छोड़कर चला जा सकता है।
फार्मेसिस्ट ही संभालते हैं ज्यादातर कार्य
इस समय स्वास्थ्य केंद्र में मुख्य रूप से फार्मेसिस्ट, दो फीमेल अस्पताल अटेंडेंट, एक ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट और एक सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं। काम का सारा जिम्मा फार्मेसिस्ट के कंधाें पर है।
वर्जन
स्टेशन स्थित डिस्पेंसरी में कोई नियमित डॉक्टर नहीं है। ऐसे में रेलवे कर्मचारियों को भारी परेशानी हो रही है। जब भी डिस्पेंसरी में जाते हैं, उसी समय इसके दोनों गेटों पर ताला लटका मिलता है।
बीडी गुप्ता, महासचिव, रिटायर्ड रेलवे एंप्लाइज एसोसिएशन
वर्जन
रेलवे स्वास्थ्य केंद, पानीपत में कांट्रैक्ट बेस पर डॉक्टर नियुक्त है। उनकी जानकारी के अनुसार वह नियमित रूप से डिस्पेंसरी में आ रहा है। फिर भी अगर किसी भी तरह के परेशानी हो तो इसके बारे में पता लगाया जाएगा।
अजय माइकल, पीआरओ, उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल