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Panipat News: प्रशासनिक अनुमति के बिना नहीं छापी जा सकती कोई भी प्रचार सामग्री

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पानीपत। विधानसभा चुनाव में प्रशासनिक अनुमति के बिना कोई प्रचार सामग्री नहीं छाप सकेंगे। इसको गैरकानूनी माना जाएगा। इसके साथचुनावी प्रचार सामग्री पर प्रकाशक का नाम व पता अंकित करना जरूरी होगा। ऐसा नहीं करने पर छह महीने की सजा हो सकती है। इसके साथ चुनावी प्रचार सामग्री में जाति, धर्म, समुदाय विशेष या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भड़काने वाली भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए।
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जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रचार सामग्री की छपाई को लेकर कुछ जरूरी निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि अपने चुनाव प्रचार के दौरान सभी राजनीतिक दल व उम्मीदवार या उनके समर्थक प्रचार के रूप में पोस्टर, पंफ्लेट, हैंड बिल - बैनर इत्यादि छपवाते हैं। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार कोई भी प्रिंटर या प्रिटिंग प्रेस का मालिक किसी भी प्रकार की गैर कानूनी सामग्री छाप कर नहीं दे सकता है। प्रचार सामग्री छपाई दस्तावेज पर किसी धर्म, जाति, समाज, भाषा विशेष या चरित्र हनन का प्रकाशन गैर कानूनी होगा। दोषी पाए जाने पर प्रकाशन व छपवाई करवाने वाले के विरुद्ध जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 127 क के अनुसार छह माह की कैद या दो हजार रुपए जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। इसके साथ ही उन्होंने निर्देश देते हुए कहा है कि इस अधिनियम के तहत कोई भी व्यक्ति कोई ऐसी निर्वाचन पुस्तिका के पोस्टर, जिसके मुख्य पृष्ठ पर उसके मुद्रक और प्रकाशक का नाम व पता नहीं है तो वह मुद्रित या प्रकाशित नहीं करेगा।
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