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संसार में कोई अमर नहीं : सरस्वती महाराज

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पानीपत। स्वामी दयानंद सरस्वती ने कहा कि एक बार नारद जी हरिनाम संकीर्तन करते हुए आकाश मार्ग से जा रहे थे। उन्होंने मार्ग में काल को जाते हुए देखा।
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नारद ने काल से पूछा कि कहां जा रहे हो तो काल ने कहा कि जिनका समय पूरा हो गया है, उन्हें लेने जा रहा हूं। काल ने कहा कि संसार में कोई भी प्राणी अमर नहीं है, चाहे वह गृहस्थ हो, साधु हो, वृद्ध हो, युवा हो जिसका समय पूरा हो जाता है, मुझे उसे मृत्युलोक से लाना पड़ता है। नारद ने काल से कहा कि यदि व्यक्ति कथा श्रवण करने वाला हो तो उसका काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
उन्होंने ये बात सेठी चौक स्थित श्री संत द्वारा हरि मंदिर में नव विक्रमी संवत 2082 के उपलक्ष्य पर संत समागम के छठे दिन शुक्रवार को कहे। नारद-काल संवाद की चर्चा के बाद महाराज ने कहा कि व्याख्या करना विद्वता नहीं है। शब्दों की हजार व्याख्याएं हो सकती हैं लेकिन परमात्मा व्याख्या करने से नहीं मिलता। जो शब्दों के जाल में पड़ जाए, वह भगवान तक नहीं पहुंच सकता।
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साधु इस व्याख्या के जाल में नहीं पड़ता। इसलिए वह उस परम तत्व का अनुभव कर पाता है। स्वामी ने कहा कि मनुष्य शरीर दुर्लभ है। सब योनियों में एक मनुष्य ही ऐसा है जो श्रेष्ठ चिंतन कर सकता है। यह जरूरी नहीं कि कोई श्रेष्ठ विद्वान आपको भगवान से मिलवा सकता है। जीवन के सत्य को समझोगे तो मौत तुम्हारे लिए उत्सव बन जाएगी।
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मरने में दुख नहीं होगा। इससे पूर्व कलानौर से पधारे महंत रामसुखदास महाराज ने भी प्रवचन से श्रद्धालुओं को निहाल किया। इस दौरान हरिद्वार से महामंडलेश्वर स्वामी अरूणदास महाराज एवं ब्रह्मर्षि नाथ महाराज भी मौजूद रहे।
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