पानीपत। जिला परिषद की मौजूदा चेयरपर्सन ज्योति शर्मा के खिलाफ बुधवार को 13 पार्षद एकजुट होकर अविश्वास प्रस्ताव पेश कर सकते हैं। इससे पहले खिलाफत में उतरे पार्षदों की बाड़ेबंदी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत सभी पार्षदों को जम्मू कश्मीर के श्रीनगर ले जाया गया था जो मंगलवार की शाम को चंडीगढ़ पहुंचे हैं। इसके बाद अब बुधवार दोपहर 12 बजे सभी एक साथ जिला सचिवालय पहुंचेंगे और डीसी के समक्ष जिप चेयरमैन ज्योति शर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रखेंगे। इसके साथ ही बहुमत से नई जिप चेयरपर्सन को चुन लिया जाएगा।
विदित हो कि भाजपा समर्थित चेयरपर्सन ज्योति शर्मा के खिलाफ उतरे पार्षद भी खुद को भाजपाई बता रहे हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है। भाजपा समर्थित पार्षदों की लड़ाई के बीच जिप वाइस चेयरपर्सन की वोटिंग मौजूदा चेयरपर्सन को बचाने और हटाने में अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि अब तक कयास लगाए जा रहे हैं कि वाइस चेयरमैन भी मौजूदा जिप चेयरपर्सन के खिलाफ वोटिंग करेंगे। इससे पहले भी कई बार पार्षद एकजुट होकर डीसी को अविश्वास प्रस्ताव सौंपने जा चुके हैं लेकिन इसमें कई अड़चने आने से ये सिरे नहीं चढ़ सका। अब देखना ये है कि बुधवार को होने वाली बैठक में जिप चेयपर्सन का ताज ज्योति शर्मा के सिर रहता है या फिर नहीं।
दूसरी ओर जिप चेयरपर्सन की दावेदारी ठोकने वाली काजल देशवाल के पति संदीप देशवाल का कहना है कि उनके साथ अब 13 पार्षद हैं। इन सभी पार्षदों में सात भाजपा कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं, इसलिए भाजपा जिसे चाहेगी उसे ही चुन लिया जाएगा। उनका दावा है कि उनके बहुमत में पार्षद वार्ड नंबर एक आकाश पोड़िया, वार्ड दो से रणदीप कवि, वार्ड तीन से अन्नू दहिया, वार्ड चार से संदीप जागलान, वार्ड पांच से रेखा रानी, वार्ड छह से डॉक्टर जगबीर, वार्ड सात से सुदेश आर्य, वार्ड दस से राजेश उर्फ राजू देहरा, वार्ड 11 से ममता, वार्ड 13 से काजल देशवाल, वार्ड 16 से पूजा और वार्ड 17 से जितेंद्र शामिल हैं। इसके अलावा एक अन्य पार्षद भी उनके खेमे में शामिल हो चुका है। इस संबंध में भाजपा जिला अध्यक्ष दुष्यंत भट्ट का कहना है कि जो भाजपा का सच्चा सिपाही है, हम उसके साथ खड़े हैं। किसी भी सूरत में पार्टी का नुकसान बर्दाश्त नहीं होगा। अगर किसी ने भाजपा का अहित करने का प्रयास किया तो उसके लिए कड़वा घूंट भी पीने के लिए तैयार हैं। विदित हो कि इस समय पार्षदों की बाड़ेबंदी भी ठीक उसी तरह की हो रही है, जो चेयरपर्सन के चुनाव के समय हुई थी।