जगमहेंद्र सरोहा
पानीपत। नगर निगम बनने के बाद सेंक्शन बजट का आकड़ा तो 100 करोड़ के पार पहुंच गया, लेकिन निगम को मिलने वाली राशि का आंकड़ा नहीं बढ़ा। इस साल भी निगम का सेंक्शन बजट 110 करोड़ 24 लाख था, जबकि करीब 28 करोड़ रुपये की मिले। यानी निगम के करीब 82 करोड़ रुपये डूब गए। ऐसे में शहर के विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है। हालांकि, नगर निगम अधिकारी वित्त वर्ष के आखिरी माह में घाटे को पूरा करने का दावा कर रहे हैं। लेकिन, अंतिम माह में इतनी मोटी राशि की रिकवरी संभव नहीं दिख रही।
नगर निगम हर साल सेंक्शन बजट रखता है। उसी के आधार पर सालभर काम किया जाता है। पिछले साल हाउस की बैठक में नगर निगम ने 110 करोड़ 24 लाख का बजट रखा था। नगर निगम अधिकारियों ने इसकी प्लानिंग भी बनाई, लेकिन प्राप्त राशि के आंकड़े में भी निगम पिछड़ गया। अब फरवरी गुजरने के बाद रिकवरी में निगम के पसीने छूट गए हैं। इसके लिए निगम अधिकारी हर रोज मीटिंग कर रहे हैैं। लोगों को सामने लाने के लिए प्रॉपर्टी टैक्स में छूट तक देने को राजी हैं।
जिस हेड से थी सबसे ज्यादा उम्मीद, उसी में डूबे
नगर निगम के बजट में निगम अधिकारियों को जिस हेड से सबसे ज्यादा पैसा आने की उम्मीद थी, निगम का बजट उन्हीं हेड में डूब गया। अकेले प्रॉपर्टी टैक्स का सेंक्शन बजट 40 करोड़ रुपये था, लेकिन हकीकत में साढ़े चार करोड़ रुपये ही आ सके हैं। निगम अधिकारी सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर ही चिंतित हैं। स्टांप ड्यूटी में 31 करोड़ रुपये निर्धारित की थी। इसमें भी मात्र साढ़े दस करोड़ ही आ सके हैं।
एक हजार रुपये वर्ग गज डेवलपमेंट जार्च लगाए तो लोग हटे पीछे
नगर निगम को डेवलेपमेंट चार्ज करीब 10 करोड़ रुपये आने की उम्मीद थी, लेकिन इसमें करीब सवा करोड़ रुपये ही आ सके। निगम के जानकारों की माने तो सरकार ने डेवलेपमेंट चार्ज एक हजार रुपये प्रति वर्गगज तय किया है। इसके बाद लोग पीछे हट गए। कोई भी डेवलेपमेंट चार्ज जमा कराने नहीं आया।
सरकारी विभागों की अनदेखी भी निगम पर भारी
सरकारी विभागों की अनदेखी भी निगम पर भारी पड़ रही है। निगम के एक अधिकारी की माने तो नगर निगम को एक्साइज ड्यूटी ग्रांट भी मिलती है। सालाना बजट में इसको दस करोड़ रुपये रखा था, लेकिन इसका एक भी पैसा नहीं मिला। बिजली निगम से प्रति यूनिट पांच पैसे म्यूनिसिपल टैक्स के रूप में नगर निगम में जमा होते हैं। निगम के बजट में इस हेड से चार करोड़ रुपये रखे गए थे, लेकिन इस हेड में भी एक पैसा नहीं आया। स्लॉटरिंग कांट्रेक्ट का बजट दस लाख रुपये था। यहां से भी रकम नहीं आई।
पैसा न आने पर यह पड़ेगा असर
नगर निगम में हर साल बजट आय के साथ खर्च को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। इसी आय से शहर के विकास कार्यों और दूसरी योजनाओं को पूरा किया जाता है। नगर निगम संभावित आय के लक्ष्य को प्राप्त नहीं पाता है तो इसका खामियाजा शहरवासियों को भी भुगतना पड़ेगा।
यह कहता है नगर निगम का बजट
हेड ऑफ अकाउंट प्रस्तावित बजट प्राप्त राशि
प्रॉपर्टी टैक्स 40,00,00,000 4,63,67,144
फायर टैक्स एंड चार्ज 25,00,000 4,59,977
मोटर टैक्स 1,00,00,000 50,21,297
स्टांप ड्यूटी 31,00,00,000 10,62,89,228
एक्साइज ड्यूटी ग्रांट 10,00,00,000 शून्य
डेवलपमेंट चार्ज 9,00,00,000 1,14,38,570
टॉवर, केबल व एटीएम 6,00,00,000 2,69,41,571
डीओटी लाइसेंस फीस 1,00,00,000 58,16,380
कॉपिंग फीस 5,00,000 12,82,703
रेंट 2,50,00,000 1,50,91,059
मलबा फीस 13,00,000 66,18,000
बीए फीस 18,00,000 3,53,345
म्यूनिसिपल टैक्स इलेक्ट्रिक 4,00,00,000 शून्य
स्लॉटरिंग कांट्रेक्ट 10,00,000 शून्य
वाटर चार्जेज 2,50,000 59,155
इंवेस्टमेंट और बैंक 1,00,00,000 70,99,805
एडवरटाइजमेंट 1,20,00,000 11,76,353
बाउंड्री चार्जेज, रोड कट 50,00,000 11,32,642
मिसलेंनियस और सस्पेंस 2,00,00,000 4,36,01,290
आरटीआई 50,000 9,250
सर्विस टैक्स 30,00,000 22,13,057
कुल 110,24,00,000 28,09,70,826
नोट : आकड़े निगम के एक सूत्र द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं। प्राप्त राशि 31 जनवरी तक की है।
सरकार के प्रतिनिधि बोले अधिकारियों की कार्यशैली नहीं ठीक
भाजपा पार्षद बोले, नीतियां जिम्मेदार
भाजपा पार्षद दुष्यंत भट्ट ने बताया कि निगम की इतनी कम आय होना चिंता का विषय है। अधिकारियों का रिकवरी पर कोई ध्यान नहीं है। नगर निगम में आय बढ़ाने के विषय में चर्चा नहीं हुई। निगम पार्षदों को जिम्मेदारी लेकर सार्थक पहल करनी चाहिए।
कांग्रेसी पार्षदों ने सरकार और अधिकारियोें पर साधा निशाना
कांग्रेसी पार्षदों ने सरकार व अधिकारियों दोनों पर निशाना साधा है। वार्ड-14 पार्षद मंजू कादियान के पति रामचंद्र कादियान ने बताया कि निगम अधिकारियों की कार्यशैली चिंताजनक है। सरकार और कोई भी अधिकारी शहर के विकास को लेकर गंभीर नहीं है। अधिकारियों को इसके लिए गंभीर होने की जरूरत है। वार्ड-17 पार्षद सुनील वर्मा ने बताया कि सदन में पार्षदों की कोई सुनवाई नहीं होती। न ही विकास कार्यों को लेकर सरकार और अधिकारी गंभीर हैं।
वर्जन
नगर निगम में अनुमानित राशि से कम रकम प्राप्त होना चिंता का विषय है। नगर निगम के बजट को आंकड़ों में बढ़ाने के साथ धरातल पर भी काम कराया जाएगा। इसको लेकर अधिकारियों से बात की जाएगी।
सुरेश वर्मा, मेयर, पानीपत।
वर्जन
निगम का बजट अनुमानित रखा जाता है। इसके बाद उसको पूरा करने का प्रयास किया जाता है। कुछ हैड में लापरवाही सामने आई है। संबंधित अधिकारी को सख्त हिदायत दी गई है। इस माह इसको पूरा कर दिया जाएगा। अधिकारियों को अगला बजट भी तैयार करने की हिदायत दी है।
वीना हुड्डा, कमिश्नर, नगर निगम पानीपत।