माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से गठित टीम ने शुक्रवार को रिहायशी कॉलोनी अंसल और टीडीआई के एसटीपी से सैंपल भरे हैं। अब इनको परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
टीम के सामने आया कि टीडीआई में एक एसटीपी चल रहा है, जबकि दूसरा जनसंख्या के हिसाब से काफी कम क्षमता का है। अंसल में संचालित दोनों एसटीपी भी यहां की जनसंख्या की तुलना में काफी कम क्षमता के हैं। यहां का गंदा पानी टैंकरों के माध्यम से ड्रेन नंबर दो और एचएसीवीपी की लाइन में छोड़ा जा रहा था। अब इन सभी तथ्यों की पूरी रिपोर्ट एनजीटी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी जाएगी। इसके बाद एनजीटी अंसल और टीडीआई पर बड़ी कार्रवाई कर सकती है।
दिल्ली निवासी पर्यावरणविद वरुण गुलाटी ने केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड को शिकायत दी थी। इस पर एनजीटी ने जिला प्रशासन, एचएसवीपी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक टीम गठित की थी। टीम को एनजीटी की ओर से 30 अप्रैल तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए थे। एडीसी डाॅ. पंकज यादव ने की अगुवाई में एचएसवीपी से जेई रिक्की छौक्कर और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से एसडीओ कुलदीप को साथ लेकर अंसल और टीडीआई के सभी एसटीपी का दौरा किया।
अधिकारियों ने बताया कि अंसल का रोजाना का करीब 15 लाख लीटर का डिस्चार्ज है। जबकि इन्होंने यहां एसटीपी प्लांट केवल 50 केएलडी के लगे मिले हैं। इसमें एक प्लांट में रोजाना करीब 50 हजार लीटर गंदे पानी को ही शोधित किया जा सकता है। बाकी के बचे हुए गंदे पानी को ये टैंकरों से भरकर ड्रेन नंबर दो में डालते थे या एचएसवीपी के सीवरेज लाइन में अवैध कनेक्शन करके डालते थे।
अब एचएसवीपी टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे अब तक डाले गए डिस्चार्ज वाटर का हिसाब बनाकर इस पर लगाए जाने वाला जुर्माने की रिपोर्ट तैयार करके देंगे। इसके अलावा अंसल के दो प्लांटों के सैंपल भी लिए हैं। टीडीआई का एक एसटीपी बंद मिला जबकि दूसरे प्लांट भी क्षमता के हिसाब से काफी कम मिला। इसके सैंपल लिए गए हैं। टीडीआई का एसटीपी सिर्फ 25 हजार लीटर पानी की क्षमता को ट्रीट करने वाला था। जबकि जनसंख्या के हिसाब से ये काफी कम क्षमता का एसटीपी है। सभी जगह से सेंपल लेकर इनकी वीडियोग्राफी कराई गई है।
अंसल के दोनों एसटीपी के सैंपल लिए गए हैं। टीडीआई में एक एसटीपी चालू और एक बंद मिला। चालू एसटीपी का भी सैंपल लिया है। दोनों जगह के एसटीपी जनसंख्या के हिसाब से काफी कम क्षमता के हैं। इनकी पूरी रिपोर्ट तैयार करवाई जा रही है। जिसे मुख्यालय भेजकर कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। - डॉ. पंकज यादव, एडीसी, पानीपत।