एनजीटी और एचएसपीसीबी की सख्ती और लगातार कार्रवाई के बाद भी कुछ उद्यमी वेस्ट जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। अब भी फैक्टरियों में दिन दहाड़े वेस्ट जलाया जा रहा है। उद्यमी एक रुपये किलोग्राम के हिसाब वाला प्लास्टिक, रबर, चप्पल जूते जला रहे हैं। इसी कारण शहर में प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। एचएसपीसीबी 40 फैक्टरियों में छापामारी कर चुका है, इनमें 25 नियमों का उल्लंघन करते मिली थी। इनको कारण बताओ नोटिस दिया गया, जबकि 13 उद्योगों पर ताले लग चुके हैं। बावजूद इसके उद्यमी बाज नहीं आ रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लापरवाही का एक बड़ा कारण ये भी है कि पिछले एक साल में चार रिजनल ऑफिसर का यहां से तबादला हो चुका है। आरओ इन उद्योगों पर कार्रवाई के लिए प्लानिंग तैयार करते हैं और मीटिंग करनी शुरू करते हैं इसी बीच उनका तबादला कर दिया जाता है।
सनौली रोड और काबड़ी रोड स्थित फैक्टरियों में सबसे अधिक वेस्ट जलाया जा रहा है। चिमनी से उठती काले धुंए के गुबार इस बात का सबूत दे रहे हैं कि प्रशासन की आंखों के सामने ये सब कुछ हो रहा है। प्रशासन सिर्फ कागजों में ही कार्रवाई कर रहा है। एनजीटी की टीम दो दिन पहले ही पानीपत का निरीक्षण कर प्रदूषण फैलाने वाले स्त्रोतों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दे चुकी है। पानीपत में 20 हजार छोटे बड़े उद्योग है। जो प्रदूषण का प्रमुख कारण है। पानीपत देश का 11 वां सबसे प्रदूषित शहर है। इसको लेकर एनजीटी लगातार सख्त है। एनजीटी प्रदूषण फैलाने पर रिफाइनरी पर साढ़े 17 करोड़ और शुगर मिल पर 20 लाख रुपये जुर्माना भी लगा चुका है। बावजूद इसके हालात नहीं सुधरे हैं।
पानीपत के पानी में मिल चुकी है साइनाइड की मात्रा
उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषित पानी अब भी सेक्टर 29 और पार्ट 11 की ग्रीन बेल्ट में ही बह रहा है। इससे पौधों को खासा नुकसान हो रहा है। ये प्रदूषित पानी भूमिगत जल में मिल रहा है। इसी कारण भूमिगत जल भी पीने योग्य नहीं रहा है। ये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2018 में की गई जांच में साबित हो चुका है। शहर के पानी में साइनाइड की 0.3 प्रतिशत मात्रा मिल चुकी है।
दो साल में 135 उद्योगों को बंद करने के हुए हैं निर्देश
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रिपोर्ट में देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों पानीपत 11वें नंबर पर रहा। दो साल में 110 बड़े उद्योगों को बंद करने और 160 से अधिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है। बिना अनुमति के भू-जल का दोहन करने वाले 48 उद्योगों को भी हाल में क्लोजर नोटिस जारी किया गया है। शहर स्वच्छता में देश में जहां 164वें स्थान पर हैै।
ग्रीन कैटेगरी में मात्र 25 उद्योग आते हैं, पर्यावरण के लिए घातक
एनजीटी ने पानीपत में लगातार बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए पानीपत के रेड कैटेगरी में आने वाले 370 और ऑरेंज कैटेगरी में आने वाले 222 उद्योगों पर जुर्माना ठोका है। इन दोनों कैटेगरी के बड़े उद्योगों को 1 करोड़ रुपये, मध्यम को 50 लाख छोटे उद्योगों को 25 लाख रुपये एनजीटी में जुर्माने के तौर पर जमा कराने होंगे। पानीपत में ग्रीन कैटेगरी में 25 उद्योग आते हैं, जोकि पर्यावरण के लिए घातक नहीं माने गए हैं।
ऑनलजाइन मॉनीटरिंग सिस्टम का असर नहीं
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उद्योगों पर वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए चिमनियों पर ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम भी लागू किया है। जिसकी मॉनिटरिंग दिल्ली और चंडीगढ़ से होती है। इसके बाद वायु प्रदूषण पर रोक नहीं लग रही है। सेक्टर 29 में कई उद्योग रात को व अलसुबह वेस्ट जलाते हैं। धुएं से कार्बन मोनोक्साइड निकलती चिमनियों से निकलने वाले कार्बन वातावरण में ऑक्सीजन के साथ कार्बन मोनोक्साइड बना देते हैं। सांस के लिए यह घातक है। बोर्ड के नियम के अनुसार काला धुआं चिमनियों से नहीं निकलना चाहिए। सफेद धुआं प्रदूषण न फैलाने की पहचान है।
डायर्स एसो. प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई पर पानीपत डायर्स एसोसिएशन के प्रधान भीम राणा ने कहा कि जो उद्योग कूड़ा-कर्कट और प्लास्टिक वेस्ट जला रहे डायर्स एसोसिएशन उनका साथ नहीं देगी। इस बारे में उद्यमियों को पहले भी सचेत किया जा चुका है।
प्रदूषण करने वाली इकाइयों पर कार्रवाई होगी : अरोड़ा
कुछ दिन हुए, पानीपत का पदभार संभाला है। प्रदूषण को लेकर विभाग सख्त है। फैक्टरियों में कचरा जलाने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
- शैलेंद्र अरोड़ा, रीजनल ऑफिसर, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड