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नया शिक्षा सत्र शुरू, सरकारी स्कूलों की किताब आई नहीं, एनसीईआरटी की ले नहीं रहे

Mon, 03 Apr 2017 11:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
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पानीपत - फोटो : पानीपत
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जगमहेंद्र सरोहा
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पानीपत। शिक्षा का नया सत्र शुरू हो गया है। सरकारी स्कूलों में भी कक्षाएं लगनी शुरू हो गई हैं। निजी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया चल रही है। इसी सप्ताह से अधिकतर स्कूलों में कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। सरकार के लाख दावों के बाद भी सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाली किताब शिक्षा विभाग के पास नहीं पहुंची हैं। बाजार में एनसीईआरटी की किताब हैं, लेकिन कोई उन्हें लेने के लिए कोई तैयार नहीं हैं। निजी स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशरों की किताबें फिर से बाजार में छा गई हैं। स्कूल प्रबंधन कुछ विषयों की किताब एनसीईआरटी की लगवा रहे हैं, बाकी किताबें प्राइवेट पब्लिशरों की लगा रहे हैं। शिक्षा अधिकारी और स्कूल प्रबंधन सब खुद को बचाने में लगे हुए हैं।
नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराने और किताबें-वर्दी दिलाने में लग गए हैं। अमर उजाला माई सिटी ने किताबों को लेकर धरातल पर जाकर रिपोर्टिंग की। इसमें सरकारी स्कूलों में किताबों की स्थिति, बाजार में एनसीईआरटी की किताबों और निजी स्कूलों की किताबों की स्थिति को देखा।
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सरकारी स्कूलों में आउट बच्चों का सहारा
सरकार पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को किताब, वर्दी और बैग देती है। अमर उजाला टीम ने शहर के आधा दर्जन स्कूलों में जाकर बच्चों को दी जाने वाली किताबों की जानकारी ली। किसी भी स्कूल में तो दूर जिला शिक्षा विभाग में भी किताब नहीं मिली। विद्यार्थियों की चिंता को देखते हुए शिक्षा अधिकारियों से बात की गई। अधिकारियों ने बताया कि शिक्षा विभाग सरकारी स्कूल के बच्चों की किताब न आने पर अपने स्तर पर काम करेगा। स्कूलों में कक्षाओं से पास आउट बच्चों से किताब वापस ली जाएंगी। इसके बाद नए बच्चों को वे किताब दी जाएंगी। इसकी जिम्मेदारी सभी स्कूल प्रमुखों और क्लास टीचर की होगी।
गिने-चुने ले रहे एनसीईआरटी की किताब
बाजार में एनसीईआरटी की किताब हैं, लेकिन इन्हें गिने-चुने ले रहे हैं। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के इक्का-दुक्का अभिभावक आते हैं, लेकिन वे भी एनसीईआरटी की एक दो विषय की किताब लेते हैं। असंध रोड लालबत्ती स्थित एक बुक डिपो के संचालक महेश ने बताया कि स्कूलों में प्राइवेट पब्लिकशरों की किताबों को लगवाया जा रहा है। ये किताब एनसीईआरटी से कई गुना महंगी हैं। एनसीईआरटी की पहली कक्षा की किताब करीब 250 रुपये में आ जाती हैं, जबकि प्राइवेट पब्लिशरों की किताब करीब ढाई हजार रुपये में आती हैं।
अधिकतर स्कूलों में अपनी दुकान या दुकानें फिक्स
निजी स्कूलों में किताबों की मनमानी है। बताया जा रहा है कि अधिकतर स्कूलों की अपनी दुकान हैं या फिर उनके द्वारा निर्धारित की गई हैं। उनकी किताब उसी दुकान पर मिलती हैं। इसके अलावा कहीं पर भी किताब नहीं मिलती। एक सीबीएसई स्कूल की किताब तो केवल ऑनलाइन ही मिल रही हैं। स्कूल संचालक एनसीईआरटी में एक या दो विषय की किताबों को ही लगाते हैं। बाकी विषयों की किताब प्राइवेट पब्लिशरों की हैं।
अभिभावक बोले सांसत में आ जाती है जान
अभिभावक बच्चों के दाखिलों और किताबों को लेकर चिंतित हैं। मॉडल टाउन निवासी मुकेश ने बताया कि उसने अपने बच्चे का दूसरी कक्षा में दाखिला कराया है। वह दाखिला कराकर किताब लेने गए तो होश उड़ गए। प्राइवेट पब्लिशर की किताब बहुत महंगी मिलीं। उसके बेटे की किताबों में एक या दो किताब एनसीईआरटी की भी हैं। एनसीईआरटी और प्राइवेट पब्लिशर की किताबों के रेट में जमीन आसमान का अंतर है।
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सरकारी स्कूलों के लिए किताब फिलहाल नहीं आई हैं। अब स्कूलों में इसको लेकर कार्यक्रम चल रहे हैं। सरकारी स्कूलों में पास आउट बच्चों से किताब लेकर नए बच्चों को दी जाएंगी। निजी स्कूल संचालक एनसीईआरटी की उपलब्ध किताबों को लगवा रहे हैं। फिर भी किसी तरह की शिकायत मिलती है तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
उदय प्रताप सिंह, डीईओ, पानीपत।
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