पानीपत। एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने एनसीआर व प्रदेश के शहरों के प्रदूषण स्तर में आई गिरावट के मद्देनजर ग्रैप के चौथे चरण की पाबंदियों को हटा लिया है। अब नेशनल व स्टेट प्रोजेक्ट्स निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो सकते हैं। पीएनजी संचालित उद्योग भी चल सकते हैं। दिल्ली में डीजल के वाहनों की एंट्री खोल दी गई है। पिछले पांच दिनों में प्रदूषण स्तर प्रदेश व एनसीआर में 150-200 अंक तक नीचे गिरा है। हालांकि अब भी प्रदेश के पांच शहरों का प्रदूषण स्तर रेड जोन में है। तीन शहरों का आरेंज व तीन शहरों का प्रदूषण स्तर येलो जोन में है। यह भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। अगर दोबारा प्रदूषण स्तर बढ़ा तो सीएक्यूएम दोबारा पाबंदियां लागू कर सकता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व सीएक्यूएम की टीमें लगातार फैक्टरियों का निरीक्षण भी कर रही हैं।
इस साल किसानों में भी पर्यावरण को लेकर जागरूकता आई है। पानीपत में सरकार ने टू-जी एथेनॉल प्लांट की स्थापना की है। यहां पराली बेचकर किसान दोहरा मुनाफा कमा सकते हैं। पानीपत में पिछले साल पराली जलाने के 254 मामले सामने आए थे। इस बार अब तक 32 मामले आए हैं। कृषि विभाग खेतों की सैटेलाइट से निगरानी कर रहा है।
पर्यावरण मामलों के एक्सपर्ट डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि इस साल पहले की अपेक्षा प्रदूषण स्तर कम रहा है। इस बार पश्चिमी हवा 15-20 दिन पहले चल रही है। इससे प्रदूषण छंट गया है। हवा की गति भी पहले की अपेक्षा तेज है। उद्योग बायोमास पर चल रहे हैं। पराली जलाने के मामले भी पहले की अपेक्षा काफी कम हैं। इसलिए प्रदूषण स्तर में सुधार हुआ है।
भवन निर्माण, रिपेयर, माइनिंग, मिक्सर प्लांट, सड़क निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्ग प्रोजेक्ट के सभी कार्यों पर लगी रोक को हटा दिया गया है। अब फिर से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। धूल न उड़े, इसके लिए स्थानीय निकाय सफाई कर्मचारियों को पानी के छिड़काव के बाद ही झाडू लगाने के निर्देश दिए गए थे।
सभी नेशनल व स्टेट प्रोजेक्ट्स से पाबंदी हटी : क्षेत्रीय अधिकारी
ग्रैप के चौथे चरण की पाबंदी हट गई है। अब नेशनल व स्टेट प्रोजेक्ट पर दोबारा काम शुरू हो सकता है। नगर निगम, एनएचएआई व पीडब्ल्यूडी को सड़कों और साइट्स पर छिड़काव करना होगा। दिल्ली में डीजल के वाहन अब जा सकते हैं।
- कमलजीत सैनी, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड