पानीपत। नेशनल हाईवे जाम करने, पुलिस पर हमला कर गोरक्षकों को छुड़वाने और वर्दी फाड़ने के आरोपों से गोरक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आजाद सिंह आर्य को डेढ़ साल पहले कोर्ट ने बरी कर दिया था, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में वह आज भी अपराधी हैं। उन पर 11 धाराओं में मुकदमा दर्ज है। जिस वजह उनके शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हो पा रहा है। आजाद आर्य का कहना है कि कोर्ट से बरी होने की कॉपी मतलौडा थाने में जमा करा चुके हैं, फिर भी उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। वह बृहस्पतिवार को एसपी कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन एसपी न मिलने पर वह निराश होकर घर लौट गए।
गोरक्षक दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आजाद सिंह आर्य ने बताया कि वह 32 साल से गो रक्षा करते आ रहे हैं। गोहत्या रोकने दिन हमेशा प्रयासरत रहते हैं। हाल में मेवात में गोहत्या रोकने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। उन पर दो बार जानलेवा हमला हो चुका है, उस पर फायरिंग की जा चुकी है, जिस मामले की रिपोर्ट मेवात के थानों में दर्ज है। ऐसे में आर्म्स लाइसेंस को रिन्यू कराने की फाइल लगाई थी। जब फाइल मतलौडा थाना में आपराधिक रिकॉर्ड चेक करने गई तो वहां आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज पाया गया। जबकि उस मामले से वह बरी हो चुके हैं।
आजाद सिंह आर्य ने बताया कि वह तीन माह से लगातार पुलिस विभाग के चक्कर काट रहे हैं। एक बार एसपी से मिलकर पूरे मामले को उनके संज्ञान में डाल चुके हैं, इसके बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अब वह इस मामले में डीजीपी प्रशांत कुमार अग्रवाल और गृहमंत्री अनिल विज से मिलेंगे।
आजाद आर्य ने कहा कि वर्ष 2014 में पुलिस ने उन पर झूठा मुकदमा दर्ज किया था। दरअसल उनके छह गोरक्षकों के खिलाफ पुलिस ने लूटपाट की धारा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था, जिस मामले में वह थाने में गए थे। आरोप है कि उनकी बात सुनने की बजाय उनपर ही झूठे आरोपों में केस दर्ज कर दिया गया। इस मामले में कोर्ट ने उसे बरी कर दिया था। जिसके बाद मानवाधिकार में थाना प्रभारी समेत अन्य के खिलाफ शिकायत भेजी थी। जो अब हाईकोर्ट में विचाराधीन है।