पानीपत। जिले के सिविल अस्पताल, पीएचसी और सीएचसी में कार्यरत एनएचएम के 450 कर्मी मंगलवार को अपनी मांगों को लेकर दो दिन की हड़ताल पर बैठ गए। सभी ने सिविल अस्पताल की नई बिल्डिंग में एकत्रित होकर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कर्मियों ने जल्द मांगें न माने जाने पर सरकार के खिलाफ और सख्त कदम उठाने की चेतावनी भी दी। हड़ताल से सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई। ऐसी ही हालत सीएचसी और पीएचसी में भी रही। मरीजों को इलाज के लिए धक्के खाने पड़े। गर्भवती महिलाओं को भी बिना स्टाफ नर्सों के परेशानी हुई। हालात देखते हुए सिविल सर्जन ने निजी अस्पतालों से मदद मांगी है।
एनएचएम एंप्लाइज एसोसिएशन ने मांगों को लेकर दो दिन की हड़ताल शुरू कर दी। हड़ताल से सिविल अस्पताल, सभी पीएचसी और सीएचसी की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। सिविल अस्पताल की हालत पहले से भी बदतर हो गई। अस्पताल के प्रसूति वार्ड में तैनात नौ स्टाफ नर्स हड़ताल पर चली गईं।
अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की संभालने के लिए मात्र एक स्टाफ नर्स रह गई। इस वजह से गर्भवती महिलाओं की देखभाल नहीं हो पाई। अस्पताल के डॉक्टरों को भी गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए मरीजों के परिजनों का सहारा लेना पड़ा। चश्मे के बनवाने तक के लिए मरीज इधर-उधर भटकते रहे।
जिले की सभी पीएचसी और सीएचसी पर भी हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं। लोगों को इलाज के लिए निजी अस्पतालाें का आसरा लेना पड़ा। हड़ताल के दौरान सुदेश पाल, डॉ.प्रदीप कुमार, अमित मलिक, अमित मिटान, रुचिका, संदीप, मुकेश कुमार, गीता, पायल, राजेश कुमार, नितिन, गौरव, राकेश, विपिन आदि मौजूद रहे।
‘सरकार नहीं दे रही मांगों पर ध्यान’
एसोसिएशन के प्रधान हरिओम देशवाल ने कहा कि वह लंबे समय से सरकार से नियमित करने, समान काम-समान वेतन, ठेकेदारी प्रथा खत्म करने और कर्मियों को नौकरी से न हटाने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने अब तक उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया है। यह बेरुखी तब है, जबकि एनएचएम कर्मी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए पूरी मेहनत से काम करते हैं।
‘कर्मियों को करना पड़ता है वेतन का इंतजार’
देशवाल ने बताया कि सिविल अस्पताल में 80 एनएचएम कर्मी हैं। अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह इन पर ही निर्भर है। सरकार ने इनकी तरफ अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया है। कर्मियों को कई-कई माह तक वेतन का इंतजार करना पड़ता है। बिना किसी कारण के एनएचएम कर्मियों को हटा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगें नहीं मानीं, तो सरकार के खिलाफ और सख्त रुख अपनाएंगे। हड़ताल बुधवार को भी जारी रहेगी।
मरीजों को उठानी पड़ी परेशानी
एनएचएम कर्मियों के हड़ताल पर जाने से अस्पताल की तबीयत बिगड़ गई। मरीजों को स्वास्थ्य विभाग के दावे के बावजूद उचित इलाज नहीं मिल सका। मरीज और उनके परिजन डॉक्टरों के केबिन, मलेरिया विभाग आदि में चक्कर ही लगाते रह गए।