नगर निगम पालिका बाजार स्थित हाउस टैक्स ब्रांच में निगम के पक्के और कच्चे कर्मचारियों ने दलालों के साथ मिलीभगत कर करोड़ों रुपये का गोलमाल कर दिया है। ये कर्मचारी पिछले करीब 8 साल से शहर की कामर्शियल इमारतों के बकाया लाखों रुपये के प्रॉपर्टी टैक्स को कुछ हजारों में ही सेटल करवाने का काम करते आ रहे हैं। जिसमें पुराने दस-दस सालों के बकाया प्रॉपर्टी टैक्स को केवल दो तीन साल पुराना दिखाकर उसमें छूट देकर उससे कम बिल तक भरवा लिया जाता रहा है। ये भी एक बड़ा कारण रहा है जिससे नगर निगम आज तक अपने बकाया प्रॉपर्टी टैक्स का वसूल पाने में नाकामयाब रहा है और निगम को करोड़ों रुपये के रेवेन्यू का नुकसान हुआ है। वीरवार को नगर निगम मेयर अवनीत कौर ने पालिका बाजार स्थित निगम कार्यालय में इस बात का खुलासा किया। उन्होंने इसकी शिकायत शहरी स्थानीय निकाय एवं गृह मंत्री अनिल विज समेत निदेशालय के मुख्य सचिव और पुलिस को भी देने की बात कही है।
उन्होंने सरकार से सभी दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए इस मामले की विजिलेंस जांच करवाने की मांग की है। इसके साथ हाउस टैक्स ब्रांच के सभी कर्मचारियों को निलंबित करने के लिए पत्राचार करने का आश्वासन भी दिया है। इस घोटाले की सबसे खास बात ये है कि इसमें लगे क्लर्क पद के कर्मचारी क्लर्क नहीं बल्कि सफाई कर्मचारियों के पदों से पदोन्नति पाकर प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच में लगे हैं। अब भी इस घपले को अंजाम देने के लिए एक चौकीदार भी शामिल पाया गया है।
ऐसे खुला घोटाले का राज
मेयर ने बताया कि उन्हें कई दिन पहले एक शिकायत मिली थी, जिसमें शिकायतकर्ता ने बताया कि उनका प्रॉपर्टी टैक्स दो लाख 85 हजार रुपये का आया था, जिसे दलाल के माध्यम से महज दो लाख रुपये में निपटाने का निगम प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सौदा किया। बात न बनने पर दूसरे दलाल ने यह सौदा मात्र डेढ़ लाख रुपये में करवा दिया, जिसमें प्रॉपर्टी ब्रांच के सरकारी क्लर्क जोगिंद्र ने डीसी रेट की एक महिला कर्मचारी के साथ मिलकर बिल को महज 59 हजार का बनाकर भरवा दिया। इसके बाद जब शिकायतकर्ता ने अपनी टैक्स की नई डिटेल निकलवाई तो उसमें उसकी तरफ दो लाख रुपये से भी ज्यादा बकाया राशि निकली। जिसके बाद उन्होंने इस मामले की जानकारी मेयर को दी।
शिकायत के बाद मेयर ने पूरे मामले की जांच पड़ताल की तो करीब बीस हजार बिल ऐसे मिले जो गलत तरीके से बनाए गए थे, हालांकि उन्होंने अभी तक सभी बिलों की गहनता से जांच पड़ताल नहीं की है। लेकिन अब तक जितने भी बिल उन्होंने जांचे तकरीबन सभी में ये गोलमाल सामने आया है। इस हिसाब से ये हजारों बिलों का घोटाला करोड़ों रुपये के गोलमाल की कहानी को बयां करता साफ नजर आ जाता है।
10 प्रतिशत सरकार की छूट, ये रहे 70 प्रतिशत
प्रॉपर्टी टैक्स के बकाया बिल के ब्याज पर सरकार की तरफ से सौ फीसदी छूट का प्रावधान है। वहीं, इस वित्तीय वर्ष के प्रॉपर्टी टैक्स पर केवल 10 प्रतिशत छूट का प्रावधान सिर्फ निगम की रेवेन्यू बढ़ाने के लिए किया गया था, जबकि मिलीभगत से रिश्वत लेकर प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच बकायादारों को 70 फीसदी तक छूट दे रही हैं, जिससे निगम को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
कोई चौकीदार, कोई सफाई कर्मचारी तो कोई डीसी रेट वाला
प्रॉपर्टी टैक्स में करोड़ों रुपये का घोटाला करने वाली प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच में सरकारी से लेकर डीसी रेट तक के तकरीबन सभी कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं। इनमें जोगिंद्र और धर्मवीर तो सफाई कर्मचारियों से प्रमोट होकर क्लर्क बने हैं, जो इस समय इस हॉट सीट को संभाल रहे हैं। चौकीदार अमित का नाम भी घपले में सामने आया है। वहीं, कई लोग डीसी रेट पर लगे हैं, जो दलालों के माध्यम से टैक्स कम करवाने का काम करते हैं। इनमें कुछ महिला कर्मचारी भी शामिल हैं।
निगम के पास नहीं पिछला रिकार्ड
पूरे घपले में हैरानी की बात सामने ये आई कि बिल भरवाने के बाद बिल को फेंक दिया जाता है, सिर्फ कस्टमर के पास एक रसीद रह जाती है, जो दर्शाती है कि कस्टमर ने मौजूदा समय में कितना बिल जमा करवाया है और उसका प्रॉपर्टी टैक्स निगम की तरफ से क्लीयर हो चुका है। निगम के पास पिछले करीब दस सालों का रिकार्ड तक उपलब्ध नहीं है, जिसका निगम कर्मचारियों ने भरपूर फायदा उठाया है।
10 साल का बिल तीन साल का करवाया
निगम में प्रॉपर्टी का पूरा रिकार्ड न होने से कामर्शियल इमारतों के पिछले 10-10 सालों के बिल को महज 3-3 साल में कंवर्ट कर दिया जाता रहा है। निगम के सरकारी दस्तावेजों में उनके पास सिर्फ 2017 तक के बिल को ही कस्टमर के खाते में दिखाया जाता था। इसके बाद बकाया बिल पर ब्याज की छूट दी जाती थी, इस वित्तीय वर्ष में दस प्रतिशत की एक्सट्रा छूट देकर एक बड़े घोटाले का अंजाम दिया जाता रहा है। इस प्रोसेस का दूसरा कारण ये भी रहा कि इस घोटाले पर किसी की नजर भी न पड़े।
प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच में करोड़ों का घपला हुआ है
निगम की प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के कई कर्मचारियों ने दलालों के माध्यम से मिलीभगत निगम को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है। इसमें कर्मचारी उपभोक्ताओं के ज्यादा बिलों को गलत तरीके से कंवर्ट करके कम बिल बना देते आए हैं। एक शिकायत के आधार पर इसकी जांच पड़ताल की गई तो ऐसे हजारों बिल सामने आ गए हैं। इसकी शिकायत मंत्री अनिल विज समेत निदेशालय सचिव तक को दी जाएगी। इसके अलावा आयुक्त व पुलिस को भी शिकायत भेजी जाएगी। वहीं मामले की जांच विजिलेंस से करवाने की मांग की गई है। वहीं सभी कर्मचारियों को हटाया जाएगा।
-अवनीत कौर, मेयर, नगर निगम, पानीपत।