पानीपत। सरकारी स्कूल के तीसरी-चौथी कक्षा के विद्यार्थियों को घटा और जोड़ भी ठीक से नहीं आता। उनका हिंदी पढ़ने का तरीका भी ठीक नहीं है। उन्हें 99 तक गिनती भी नहीं जाती। यह खुलासा मई माह में हुई दूसरी, तीसरी और चौथी कक्षा के बच्चों के परीक्षा परिणाम में हुआ।
पूरे प्रदेश की बात करें तो 24 फीसद ने ही परीक्षा पास की, जबकि 76 फीसद बच्चे यह आसान सी परीक्षा भी पास नहीं कर पाए। जिला अनुसार पहले स्थान पर गुरुग्राम और झज्जर रहे, जिनका परिणाम 35 से 40 फीसद के बीच रहा। दूसरे स्थान पर रोहतक रहा, जिसका परिणाम 30 से 35 फीसद के बीच रहा और तीसरे स्थान पर पानीपत और जींद रहा। इसका परिणाम 25 से 30 फीसद के बीच रहा।
पानीपत से 1200 ने लिया था भाग
प्रदेश सरकार ने प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को निपुण बनाने के लिए फाउंडेशन लिटरेसी और न्यूरेसी निपुण हरियाणा के तहत 15 से 31 मई तक परीक्षा ली थी। पूरे प्रदेश के 24,033 बच्चों ने परीक्षा दी थी, जिसमें 5755 बच्चों ने पास की। इस परीक्षा को लेकर जिले के 243 प्राथमिक स्कूलों में से 50 से अधिक स्कूलों का चयन किया गया था। इन्हीं स्कूलों में परीक्षा आयोजित की गई थी, जिनमें पूरे जिले के करीब 1200 बच्चों ने हिस्सा लिया था।
परिणाम सुधारने पर मंथन
भविष्य के लिए तय किए टारगेट बीते सप्ताह स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने पंचकूला में बीईओ और बीआरसी की बैठक ली, जिसमें फाउंडेशन लिटरेसी और न्यूरेसी निपुण हरियाणा के तहत हुई परीक्षा के आए खराब परिणाम को सुधारने पर मंथन किया। सभी जिलों के लिए नए टारगेट दिए और हर सत्र में सुधार करने को कहा। वर्ष 2023-24 के लिए 55-60 प्रतिशत का आंकड़ा छूने को कहा। इसके बाद वर्ष 2024-25 में परीक्षा का परिणाम 75 से 80 प्रतिशत तक ले जाने के निर्देश दिए। वहीं वर्ष 2025-26 में परिणाम में सुधार करते हुए 100 प्रतिशत तक आंकड़ा ले जाने पर विचार-विमर्श हुआ।
दूसरी कक्षा के बच्चों को पढ़ने थे 45 शब्द
परीक्षा में प्रथम कक्षा के बच्चों को 15 शब्द पढ़ने आने चाहिए थे। दो अक्षरों का जोड़, 99 तक गिनती आनी चाहिए थी। एक डिजिट का घटा जोड़ भी करना आना चाहिए, लेकिन करीब 30 प्रतिशत बच्चों को ही यह जानकारी थी। दूसरी कक्षा के बच्चों को एक मिनट में 45 शब्द पढ़ने थे। पहरे में प्रश्न भी छांटने थे। दो डिजिट का घटा जोड़ भी करना था और 99 तक गिनती भी पूछी गई थी। ऐसे बच्चे केवल 23 प्रतिशत ही थे, जिन्हें इसकी जानकारी थी। तीसरी कक्षा के बच्चों को एक मिनट में 60 शब्द पढ़ने थे। पहरे में से उत्तर छांटने थे। 999 तक गिनती और एक डिजिट की गुणा भी करनी आनी चाहिए। जिले के ऐसे 28 प्रतिशत बच्चे थे।
वर्जन-
परीक्षा के लिए जिन स्कूलों का चयन किया गया था, उनमें शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए जिलास्तर पर टीम गठित की जाएगी। वह टीमें इन स्कूलों में जाकर निरीक्षण करेंगी और उनमें क्या-क्या खामियां हैं, उनको सुधार जाएगा।
-राकेश स्वामी, जिला समन्वयक, एफएलएन, पानीपत।