पानीपत। आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर की याचिका पर लोकायुक्त कोर्ट ने डिफाल्टर जन सूचना अधिकारियों पर कड़ा कदम उठाया है। अब आरटीआई के तहत गलत सूचना देने वाले अधिकारियों के वेतन से जुर्माना ऑटोमेटिक सिस्टम से कटेगा। इन अधिकारियों को बकाया जुर्माना राशि जमा कराए बगैर नो ड्यूज सर्टिफिकेट या अंतिम वेतन प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा। जुर्माना राशि को मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली से लिंक किया जाएगा। इसके बाद इसे कर्मचारियों की ई-सेलरी से लिंक किया जाएगा।
लोकायुक्त ने ये कदम अधिकारियों की मनमानी को रोकने के लिए लगाया है। डिफॉल्टर जनसूचना अधिकारियों पर सरकार के 2. 65 करोड़ बकाया हैं। लोकायुक्त जस्टिस हरि पाल वर्मा ने इस संबंध में सरकार को आदेश जारी किए हैं। लोकायुक्त इस केस की आगामी सुनवाई पांच अक्टूबर को करेगा। आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने 21 जुलाई 2020 को लोकायुक्त कोर्ट में केस दायर करके प्रदेश के कुल 1760 डिफॉल्टर जन सूचना अधिकारियों से करोड़ों रुपये की बकाया जुर्माना राशि वसूली कराने की मांग की थी ।शिकायत में आरोप लगाया कि जन सूचना अधिकारियों ने आरटीआई एक्ट का मजाक बना दिया है,न तो निर्धारित 30 दिन में सूचना देते हैं और न ही सूचना आयोग द्वारा लगाई जुर्माना राशि को सरकारी खजाने में जमा करवाते हैं। इन डिफाल्टरों में कई एचसीएस व क्लास वन अधिकारी भी शामिल हैं। जो वर्षों से जुर्माना राशि दबा कर बैठे हैं । लोकायुक्त के नोटिस के पश्चात मार्च 2021 में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जुर्माना राशि वसूली के लिए उच्च स्तरीय मॉनीटरिंग भी कमेटी गठित हुई लेकिन इस संबंध में कड़े कदम नहीं उठाए गए।