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पानीपत में फिर ‘जंग’, संकट में शहर की सरकार

Fri, 29 Jul 2016 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
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नगर ‌निगम - फोटो : पानीपत
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पानीपत। सिटी पॉलिटिक्स में एक बार फिर मेयर को बदलने का सिलसिला शुरू हो गया है। इससे शहर की सरकार संकट में आ गई और ‘पानीपत की जंग’ फिर से एलान कर दिया गया है। इस बार भी भाजपा पार्षद सबसे आगे हैं। मेयर सुरेश वर्मा के खिलाफ 11 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग की है। इन सभी ने उपायुक्त को शपथ पत्र भी सौंप दिए हैं और मेयर सुरेश वर्मा के कार्यों पर असंतोष जाहिर किया है। डीसी ने पूरी रिपोर्ट मंडलायुक्त को भेज दी है। मंडल आयुक्त ही मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तारीख तय करेंगे। दूसरी तरफ मेयर सुरेश वर्मा अपनी कुर्सी बचाने के लिए कांग्रेसी नेता वीरेंद्र सिंह बुल्ले शाह के पास पहुंच गए हैं। उन्होंने वीरेंद्र सिंह से समर्थन मांगा है। मेयर सुरेश वर्मा खुद को कांग्रेसी बात रहे हैं और पार्षदों के अविश्वास प्रस्ताव को ड्रामा बताया है।
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नगर निगम के 11 पार्षद शुक्रवार को लघु सचिवालय स्थित उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे को मेयर सुरेश वर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए शपथ पत्र सौंपे और बैठक बुलाने की मांग की। इस पर डीसी ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए बैठक का फैसला मंडल आयुक्त ही ले सकते हैं। वे अपनी रिपोर्ट उन्हें भेज देंगे। विदित है कि भूपेंद्र सिंह के खिलाफ अविश्वास लाने के बाद 22 जून 2015 को चुनाव हुआ था। इसमें सुरेश वर्मा ने भाजपा के दुष्यंत भट्ट को पांच वोट से हराया था और मेयर बने थे।

इन पार्षदों ने सौंपे शपथ पत्र
डीसी को शपथ पत्र सौंपने वालों में वार्ड-24 पार्षद दुष्यंत भट्ट, पूर्व मेयर एवं वार्ड-11 भूपेंद्र सिंह, वार्ड-19 पार्षद लोकेश नांगरू, वार्ड-18 पार्षद संजीव दहिया, वार्ड-तीन पार्षद हरीश शर्मा, डिप्टी मेयर एवं वार्ड-चार पार्षद सीमा पाहवा, वार्ड-12 पार्षद सतीश सैनी, वार्ड-13 पार्षद सुधा अग्रवाल, वार्ड-पांच पार्षद जयकुमार बिंदल और वार्ड नौ पार्षद सुनीता रामदेव।
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भाजपा ने अपना बताया था, मेयर कांग्रेसी हो गए
सुरेश वर्मा 22 जून 2015 को मेयर बने थे। उन्होंने भाजपा पार्षद दुष्यंत भट्ट को क्रॉस वोटों के सहारे पांच वोटों से मात दी थी। भाजपा के तत्कालीन जिला अध्यक्ष गजेंद्र सलूजा ने मेयर सुरेश वर्मा को भाजपा का बताया था। सुरेश वर्मा लंबे अरसे तक साइलेंट होकर काम करते रहे। नगर नगम के वार्ड नौ के उप चुनाव में 10 मई 2016 को मेयर सुरेश वर्मा कांग्रेस के खेमे में खड़े मिले। इसके बाद सभी हैरान नह गए थे।

खादी बोर्ड के चेयरमैन और जिलाध्यक्ष के साथ मीटिंग
भाजपाई और उसके समर्थक पार्षदों ने वीरवार देर रात को खादी ग्रामोद्योग के चेयरमैन संजय भाटिया के साथ ही जिलाध्यक्ष प्रमोद विज के साथ मीटिंग की थी। सरकार तक बात पहुंचाने का जिम्मा चेयरमैन संजय भाटिया को दिया गया। परिवहन एवं आवास मंत्री कृष्णलाल पंवार के साथ ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा और शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी को मनाने के लिए जिलाध्यक्ष प्रमोद विज तैयार हो गए थे।

अविश्वास लाने और हटाने में पार्षदों का गणित
नगर निगम में 24 वार्ड हैं। नगर निगम एक्ट के अनुसार मेयर के खिलाफ अविश्वास लाने के लिए एक तिहाई यानी आठ पार्षदों का होना जरूरी है। भाजपा और इसके समर्थक 11 पार्षद डीसी के सामने पेश होकर पहली परीक्षा को पास कर चुके हैं। अब दूसरी परीक्षा मेयर को हटाने की है। इसको लेकर 17 पार्षदों का होना जरूरी है। भाजपा के पास फिलहाल 11 पार्षद हैं। भाजपा इस परीक्षा को पास करने के लिए छह पार्षदों की तलाश में जुट गई है। कांग्रेस के आठ पार्षद आज भी निर्णायक स्थिति में हैं।

मेयर बोले, मैंने भ्रष्टाचार पर लगाम कसी
मेयर सुरेश वर्मा ने कहा कि उनके ऊपर लगे भ्रष्टाचार और काम में भेदभाव के आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने तो भ्रष्टाचार पर लगाम कसी है। कई पार्षदों को पहले निगम से कुछ भी नहीं जाता था, लेकिन उनके मेयर बनने के बाद उनके सब दरवाजे बंद हो गए। ऐसे पार्षद अब परेशान हैं। वही आरोप लगा रहे हैं। दावा किया कि डीसी के सामने पेश होने वाले 11 पार्षदों में से पांच अब भी उनके पक्ष में हैं। ये सब सरकार के दबाव में आकर काम कर रहे हैं। उन्हें हटाकर खुद मेयर बनने का सपना देखने वाले पार्षदों का सपना कभी पूरा नहीं होगा। वह कांग्रेसी हैं और कांग्रेसी ही रहेंगे। कांग्रेसी और समर्थित पार्षदों के सहारे फिर से विश्वास साबित कर देंगे।  
वर्जन
नगर निगम के 11 पार्षदों ने मेयर सुरेश वर्मा के खिलाफ अविश्वास बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र मुझे सौंपे हैं। मैंने रोहतक मंडलायुक्त को इस बारे में अवगत करा दिया है। इसको लेकर मंडलायुक्त ही निर्णय ले सकते हैं। मंडलायुक्त से तारीख मिलते ही बैठक बुला ली जाएगी।
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डॉ. चंद्रशेखर खरे, उपायुक्त पानीपत।
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