मशीन से बनाए डिस्पोजल दिखाती मुकेश रानी। स्रोत : स्वयं
पानीपत। परिवार और खेत-खलिहान तक सीमित रहने वाली मुकेश रानी अब डिस्पोजल बनाकर स्वयं के साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार देकर सशक्त बना रही है। पांच साल पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मुकेश ने गांव में ही अपना गोरख महिला स्वयं सहायता समूह बनाया और उसके माध्यम से आत्मनिर्भर बनकर अब अन्य महिलाओं को रोजगार के अवसर दे रही है और परिवार की आर्थिक मदद कर रही है।
महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। कुराड़ गांव की मुकेश रानी पांच साल पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़ी उसने दो साल पहले समूह के माध्यम से ही डिस्पोजल बनाने की मशीन खरीदी। मुकेश रानी ने बताया कि शुरुआत में वह अकेली ही डिस्पोजल बनाती थी। धीरे-धीरे आस-पसोड़ की महिलाएं भी उसकी मदद करने लगी। अब डिस्पोजल को पैकेट में पैक करवाने के लिए लगभग पांच महिलाएं और उसका सहयोग करती हैं जो समूह से भी जुड़ चुकी हैं। अब वे भी समूह के जरिये आय कमा रही हैं। डिस्पोजल के बड़े पैकेट में 100 डिस्पोजल होते हैं जो तीस रुपये में बेचा जाता है और छोटा पैकेट बीस रुपये में बेचती है जिसमें 50 डिस्पोजल होते हैं। वह समूह के माध्यम से ही कई बार अन्य जिलों में भी स्टाॅल लगा चुकी है और स्टॉल से अच्छी आय कर चुकी है।
पति मेहनत-मजदूरी से करता था परिवार का भरण पोषण
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण मुकेश के पति मेहनत-मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते थे। वह भी पशुओं और खेत-खलिहान में मेहनत करती थी और परिवार का गुजारा चलाती थी। अब पिछले दो साल से मुकेश और उनके पति डिस्पोजल बनाकर अच्छी आय कमा रहे हैं और पहले से बेहतरीन जीवन जी रहे हैं।
मशीन से बनाए डिस्पोजल दिखाती मुकेश रानी। स्रोत : स्वयं