कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र में तिरंगे की आजादी की दसवीं वर्षगांठ के साथ-साथ नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती मनाई गई। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष जयभगवान शर्मा डीडी ने कहा कि सांसद नवीन जिंदल ने आज से दस साल पहले देशवासियों को तिरंगे के रूप में जो तोहफा दिया था, उससे चहुंमुखी विकास के रास्ते खुल गए। हरियाणा वित्त आयोग के सदस्य सुभाष सुधा ने कहा कि कुरुक्षेत्र निवासियों को अपने सांसद पर नाज है।
कांग्रेस भवन, ओपी जिंदल पार्क और ब्रह्मसरोवर में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराकर जश्न मनाया गया। इसके बाद उपस्थित सभी लोगों ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। वक्ताओं ने कहा कि 23 जनवरी 2004 को सांसद नवीन जिंदल ने देशवासियों को 365 दिन तिरंगा फहराने का अधिकार दिलाया था।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मील का पत्थर साबित हुआ। आज लाखों की संख्या में लोग प्रति दिन तिरंगा फहराकर देश के प्रति अपनी निष्ठा, प्रेम और समर्पण का इजहार कर रहे हैं। आज का दिन हमारे लिए गौरव का दिन है क्योंकि हम घर, बाहर, दफ्तर, दुकान या प्रतिष्ठान में राष्ट्रीय ध्वज को पूरे मान-सम्मान के साथ फहरा सकते हैं।
सांसद जिंदल के निजी सचिव राजेश कुमार और हलका प्रभारी विक्की शर्मा ने कहा कि नवीन जिंदल का मानना है कि तिरंगा हमें जात-पात, मजहब, पंथ, क्षेत्र व अन्य भेदभाव से ऊपर उठकर देश के लिए एकजुट भाव से काम करने की प्रेरणा देता है। यह हमारे मूल्यों और विश्वास का प्रतीक है। यह भारत की संप्रभुता का सर्वोच्च प्रतीक चिन्ह है।
इस अवसर पर फतेह सिंह खेड़ी रामनगर, पूर्व शहरी अध्यक्ष विनोद शेखरी, नगर परिषद उपाध्यक्ष राज गौड़, पृथ्वी सिंह तुर्क, रामकुमार रंबा, सुरेंद्र फौजी, राजकुमार वत्स, टोनी मदान, परमजीत चीमा, राजेश शर्मा अमीन, राजीव गोयल, सुनीता नेहरा, राजरानी, रेखा कश्यप, भरपाई नंबरदारिनी, निशि गुप्ता, राममूर्ति, दर्शना नांदल, वीणा सैनी, मंजू राव, हरफूल कसेरला, तरुण गुप्ता, शमशेर कश्यप, सतीश मदान, लाल सिंह सैनी, विनोद गर्ग, विवेक भारद्वाज डब्बू, रघुबीर संधु, अंकित गर्ग, नवीन बंसल, दर्शन खन्ना, आरके मित्तल, मुरारी लाल सैनी, गुरचरण सिंह एडवोकेट, दौलतराम नंबरदार, प्रवीण शर्मा, चरणजीत बगथला, जसबीर सांवला, चौधरी राम बजाज, लीलूराम, पूर्व सरपंच राजकुमार, दरबारा सिंह एमसी, रतन सिंह सैन, सुरेंद्र सरपंच, सुरजीत रावगढ़, राजकुमार मित्तल, गोपाल एमसी, रिखी राम दलखेड़ी, बलकार जोगनाखेड़ा, सूबा सिंह मुंडाखेड़ा मौजूद थे।