संवाद न्यूज एजेंसीपानीपत। आदियाना गांव की बेटी और भारतीय पहलवान निशा दहिया का एशियन गेम्स में सफर पहले ही मुकाबले में थम गया।
बुधवार को जापान में महिलाओं के 68 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती वर्ग के राउंड ऑफ-16 मुकाबले में निशा को उत्तर कोरिया की पाक सोल गुम से हार का सामना करना पड़ा। इससे परिवार के सदस्य मायूस जरूर हैं, लेकिन उनकी मां ने कहा कि खेल में हार-जीत चलती रहती है। खेल के दौरान निर्धारित समय तक दोनों पहलवान 4-4 की बराबरी पर थीं, लेकिन मुकाबले के आगे बढ़ने पर निशा को हार मिली। इसके साथ ही उनका पदक जीतने का अभियान समाप्त हो गया। निशा से आदियाना गांव में परिवार और खेल प्रेमियों को काफी उम्मीदें थीं। निशा ने संघर्ष और मेहनत के दम पर भारतीय कुश्ती में अपनी पहचान बनाई है।
निशा अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करीब 15 पदक जीत चुकी हैं। लगातार बेहतर प्रदर्शन के दम पर उन्होंने भारतीय टीम में जगह बनाई। एशियन गेम्स के लिए हुए ट्रायल में उन्होंने 30 मई को दिल्ली में मानसी लाठर को 4-3 से हराकर भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की की थी।
निशा के खेल कॅरिअर में चोटों ने भी कई बार चुनौती पेश की। वर्ष 2024 में पेरिस ओलंपिक से पहले उन्हें कंधे में चोट लगी थी। इसके बावजूद उन्होंने वापसी की और पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
निशा की हार पर उनकी मां ने कहा कि निशा ने चोटों और मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद जिस तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, वह उनके संघर्ष और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
कुश्ती से नहीं बास्केटबॉल से की थी शुरुआत
खास बात यह है कि उन्होंने खेल की शुरुआत कुश्ती से नहीं, बल्कि बास्केटबॉल से की थी। बाद में उन्होंने कुश्ती को अपना लक्ष्य बनाया और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल की। निशा ने सातवीं कक्षा में जींद के निडानी स्पोर्ट्स स्कूल में प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने कुश्ती की बारीकियां सीखीं और विभिन्न प्रतियोगिताओं में पदक जीते। वर्ष 2014 से वह रोहतक में कोच सत्यवान के मार्गदर्शन में अभ्यास कर रही हैं।