पानीपत में मोबाइल फोन पर पूरी रेंज उपलब्ध कराने के लिए शहर के कोने-कोने में लगे 185 मोबाइल टावर शहरवासियों को बीमार करने के लिए काफी हैं।
तमाम प्रयासाें के बाद नगर निगम एक भी मोबाइल टावर को आबादी से शिफ्ट नहीं करा पाया। निगम इस मामले में सिर्फ नोटिस देने तक सिमट कर रह गया है।
आधुनिकता के इस युग में जहां हम हाईटेक सुविधाओं से लेस विभिन्न उपकरणों का इस्तेमाल करके सुखमय जीवन जी रहे हैं, वहीं इनका हमारे स्वास्थ्य पर किस तरह से प्रभाव पड़ रहा है। इस तरफ ध्यान देने की जहमत तक नहीं उठाते। मोबाइल फोन में पूरी रेंज उपलब्ध कराने के लिए शहर के हर हिस्से में विभिन्न सेल्युलर कंपनियों के मोबाइल टावर लगे हैं। इन टावरों में रेडिएशन से निकलने वाली किरणाें से स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डालती हैं।
आबादी से बाहर होने चाहिए टावर
घनी आबादी के बीच मोबाइल टावर लोगों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। विशेषज्ञों की राय है कि ये टावर आबादी से बाहर होने चाहिए। सिविल अस्पताल के एमएस डॉ. भूपेश चौधरी सहित अन्य डॉक्टरों की मानें तो इन टावरों के रेडिएशन के कारण हर पल सेहत को नुकसान पहुंचता है।
रेडिएशन से सुनने की क्षमता में कमी आती है। दिल की बीमारी, ब्लड प्रेशर, हर वक्त थकान, याददाश्त का कम होना और लगातार सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा ये पक्षियों के लिए भी हानिकारक हैं। विशेष रूप से गोरैया की संख्या होने का कारण भी मोबाइल टावर ही हैं। मधुमिक्ख्यों के लिए भी रेडिएशन खतरनाक साबित हुआ है।
यह इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक रेडिएशन न सिर्फ पक्षियों बल्कि फल-सब्जियों के साथ-साथ दूध पर भी पड़ता है। जिस क्षेत्र में टावर लगा होगा वहां पर फलोें के पेड़ मात्र छाया ही देंगे, फल नहीं।
नोटिस तक ही सीमित है कार्रवाई
लोगों के विरोध के बाद नगर निगम सिर्फ नोटिस देने की कार्रवाई तक सीमित है। आज तक एक भी टावर आबादी के बीच से हटा। लोग सिर्फ विरोध करके ही रह जाते हैं। कई बार लिखित शिकायत भी दे चुके हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाती।
कई टावरों का लाइसेंस भी नहीं
नगर निगम अधिकारी भी इस बात को मानते हैं कि कई मोबाइल के तो लाइसेंस भी नहीं है। कुछ समय पहले जांच अभियान में नगर निगम ने कुछ टावरों को अवैध करार देकर सील भी किया था, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई। अधिकारियों की मानें तो टावर से संबंधित कंपनियां सांठ गाठ करके उन्हें दोबारा फिर चालू करा लेती है। इसके अलावा शहर के पुराने हिस्से में तो ज्यादातर टावर पुरानी बिल्डिंगों पर ही हैं। कई टावर तो कंडम भवनों पर ही लगे हैं। इससे आसपास के मकानों में रहने वाले लोगों के जान और माल की भी हानि होती है।
यह है नियम
नगर निगम ने मोबाइल टावर को लाइसेंस देने से पहले कई तरह के नियम और शर्ताें की लिस्ट तो सूची कर रखी है। लेकिन उसका अनुसरण कराने की जहमत नहीं उठाता।
टावर घनी आबादी से दूर होना चाहिए।
जिस जगह पर टावर लगाया जाता है वह प्लाट खाली होना चाहिए।
उससे निकलने वाली रेडिएशन की रेंज कम होनी चाहिए।
कम आबादी में जिस बिल्डिंग पर टावर लगाया जाता है, वह कम से कम पांच छह मंजिला होनी चाहिए।
टावर के लिए रखा गया जेनरेटर बंद बॉडी का होना चाहिए, जिससे कि शोर न हो।
जिस बिल्डिंग की छत पर टावर लगाया जाता है वह कंडम नहीं होनी चाहिए।