पानीपत। विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेषज्ञों ने बीमारी से बचने का पाठ पढ़ाया। इसके लिए लोगों को जागरूक होकर आगे आने और किसी भी बीमारी का चिकित्सक से पूरा इलाज कराने की बात कही। विशेषज्ञों ने साफ किया कि कुछ लोग बीमारी जानकर भी अनजान बन जाते हैं, लेकिन उनकी अनदेखी से बीमारी घातक हो जाती है। खांसी छोटी लगती है, लेकिन अनदेखी बरतने से खांसी गंभीर बीमारी बन जाती है। विशेषज्ञों ने साफ किया कि अच्छी शारीरिक व मानसिक सेहत में मोबाइल सबसे बड़ी बाधा है।
विशेषज्ञों ने यह बातें शुक्रवार को एसडीपीजी कॉलेज में विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विभिन्न विषयों पर आयोजित सेमिनार में कहीं। सेमिनार वाईआरसी और एनएसएस के तत्वावधान में आयोजित किया गया। सेमिनार और कैंप में कॉलेज के लगभग 250 छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों ने हिस्सा लिया। मुख्यातिथि एवं वक्ता डिप्टी सीएमओ डॉ. ललित वर्मा, अतिविशिष्ट अतिथि में एमडीएस डॉ. मनीष शर्मा और एबट इंडिया के सीनियर डिविजन मैनेजर हरीश अरोड़ा रहे।
सिविल अस्पताल के एएचसी अतुल व डीएएचओ डॉ. मनीषा ने बच्चों का ख्याल रखने, एएचसी अंजू गौतम ने मासिक धर्म के समय स्वच्छता, विनोदकुमार ने मानसिक स्वास्थ्य पर अपने विचार रखे। प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा, एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राकेश गर्ग, एनएसएसअधिकारी डॉ. संतोष कुमारी औरडॉ. एसके वर्मा आदि मौजूद रहे।
बॉक्स
खुशी ने पोस्टर मेकिंग में पाया पहला स्थान
कॉलेज में पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता कराई गई। जिसमें बीकॉम तृतीय की खुशी ने पहला, बीकॉम द्वितीय के सौरभ ने दूसरा और बीए तृतीय की प्रतिमा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
बॉक्स
युवाओं को भविष्य की चिंता छोड़ वर्तमान में जीना चाहिए
पानीपत। विनोद कुमार ने मानसिक स्वास्थ्य पर कहा कि युवाओं को भविष्य की निरर्थक चिंता करने की बजाय वर्तमान में जीना चाहिए और आत्महत्या जैसे दुखद कदम नहीं उठाने चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों ने प्रश्न पूछे और उनका समाधान बताया। उन्होंने कहा कि तनाव और अवसाद में आए व्यक्ति से बात करनी चाहिए।
डीएएचओ डॉ. मनीषा ने कहा कि सामाजिक जीवन में तेजी से बदलाव आए हैं। युवा पीढ़ी के लोग शराब जैसे नशे करने लगे हैं। उनका मानना है कि जीवन छोटा है और हमें इसका खुलकर आनंद लेना चाहिए। माता-पिताको अपनी जिम्मेदारी को निभाना होगा। कई बार बच्चे अपने जीवन आगे बढ़ने के लिए सोशल मीडिया की मदद लेना शुरू कर देते हैं। इस पर कुछ लोग गलत कमेंट करते हैं, यदि हमारी गतिविधियां सकारात्मक और रचनात्मक हैं तो हमें उनके गलत कमेंट से घबराना नहीं चाहिए और आगे बढ़ते रहना चाहिए। डॉ. ललित वर्मा ने कहा कि टीबी और एचआईवी को देश से समाप्त करना होगा। ये रोग दुख का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं। इसमें लापरवाही बड़ा कारण है। प्राचार्य. डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि हमें जीवन की चिंताओं को छोड़कर तनावमुक्त और खुशनुमा माहौल बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानसिक और शारीरिक बीमारियों की जड़ हमारा मोबाइल है। इसका न्यायसंगत और ध्यानपूर्वक इस्तेमाल करें। कैंप के दौरान विद्यार्थियों के दांतों की जांच कर दिए उन्हें इस बावत टिप्स भी दिए गए।