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फिर याद आई पानीपत की लड़ाई

Tue, 14 Jan 2014 11:57 PM IST
अमर उजाला, पानीपत
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पानीपत। काला अंब में मनाए शौर्य दिवस पर एक बार फिर पानीपत की तीसरी लड़ाई याद आई। लड़ाई के 253 साल पूरे होने पर एक बार फिर उसी जमीं पर प्रदेश के रोड़ मराठा और महाराष्ट्र के मराठा एकजुट हुए और एक साथ मिलकर 253 साल पहले के इतिहास को याद कर अपने पूर्वजों की शहादत को नमन किया।
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समारोह में कलाकारों के करतब हैरतअंगेज थे। मंगलवार को मौका था पानीपत की तीसरी लड़ाई के शौर्य दिवस समारोह का। काला अंब के पास उग्रा खेड़ी गांव के स्टेडियम में समारोह रखा। महाराष्ट्र से पहुंचे मराठा वंशजों ने अपने पूर्वजों के खून से सींची जमीन को नमन किया और देशभक्ति के नारे लगाए।

समारोह के मुख्य अतिथि भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी नहीं पहुंच सके। इसके बावजूद मराठों का हौसला कम नहीं हुआ। उन्होंने मराठों के जयकारे लगाए और उनकी याद में करतब दिखाकर सबको हैरत में डाल दिया।
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मुख्य अतिथि के न पहुंचने पर विशिष्ट अतिथि पांडुरंग बलकावड़े, इतिहासकार डॉ. बसंतराव मोरे, प्रो. नाना सी जोशी ने लोगों में उत्साह भर दिया। समारोह की अध्यक्षता मराठा जागृति मंच के अध्यक्ष और भाजपा नेता मराठा वीरेंद्र वर्मा ने की।

इस मौके पर प्रकाश पाटिल, सुखदेव पाटिल, भाजपा के जिलाध्यक्ष गजेंद्र सलूजा, निकाय प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक संजय भाटिया, सुरेंद्र अहलावत, सुरेंद्र रेवड़ी, दुष्यंत भट्ट, सुनील सगवाल, सुरेंद्र धवले और नाना देवकर मौजूद रहे। वक्ताओं ने मराठों की वीरता पर जमकर जयकारे लगाए। उन नारों ने लोगों को भी उत्साहित कर दिया।

मराठा वीरेंद्र वर्मा ने कहा कि मराठों ने पानीपत की तीसरी लड़ाई में अहमदशाह अब्दाली और उसकी सेना का सामना किया था। इस लड़ाई में मराठों ने अपनी कुर्बानी दी थी और बचे मराठे कुरुक्षेत्र के आसपास जंगलों में जाकर बस गए।

एक लंबे अरसे बाद इतिहासकारों ने हरियाणा के रोड़ को मराठों का वंशज बताया। उन्होंने कहा कि मराठों को लेकर 1761 का इतिहास याद करने की जरूरत है और इसको देश में त्योहार की तरह मनाना चाहिए। महाराष्ट्र से पहुंचे लोगों ने कालाअंब में पहुंच अपने पूर्वजों की बहादुरी की जमीन को देखा और नमन किया।

यहां पर दिनभर दर्शन करने वालों का तांता लगा रहा। कई लोग काला अंब की जमीन पर पहुंच भावुक हो गए और 253 साल पहले के इतिहास के बारे में सोचने लगे। मराठों के शौर्य दिवस समारोह में राजनीति का रंग भी दिखाई दिया।

मंच संचालन करते समय जयपाल ने कहा कि 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई में मराठे जीते नहीं थे तो वे हारे भी नहीं थे। उन्होंने कहा कि पानीपत की इससे पहले दो लड़ाइयों में विजय प्राप्त करने वाली सेना ने दिल्ली पर राज किया था।

लेकिन अहमद शाह अब्दाली दिल्ली तक नहीं पहुंच सके। उनको मराठों ने अपने प्राणों का बलिदान देकर रोका था। उन्होंने कहा कि रोड़ मराठा 2014 में पीछे नहीं हटेंगे और मराठा वीरेंद्र वर्मा को आगे लेकर दिल्ली में पहुंचेंगे। मुख्य वक्ता सुखदेव पाटिल ने भी मराठा वीरेंद्र वर्मा को आगे बढ़ाने की तरफ इशारा किया।

ये रही झलकियां
काला अंब युद्ध स्मारक में मराठा पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने वालों में महिलाएं भी श्रद्धांजलि देने पहुंची।
महिलाएं रोड़ मराठों के घर से एकत्रित किए जल के मटके सिर पर रखकर गीत गाते हुए युद्ध स्मारक पर पहुंची।
यहां पर उन्होंने अपने शहीद पूर्वजों को जल तर्पण किया।
पानीपत की जमीन पर छत्रपति शिवाजी महाराज के ध्वज जैस लहराने पर सबके चेहरे खिल गए। सभा स्थल पर मां जिजाऊ माता जीजाबाई की मूर्ति के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज, महारानी ताराबाई, महादेवजी शिंदे, यशवंज राव पवार, मल्हारराव होलकर, छत्रपति शाहू जी महाराज, सदाशिवराव भाऊ की तस्वीर आकर्षण का केंद्र रही।

सभा स्थल में चारों तरफ शिवाजी राव के जयकारे गूंजते रहे। कोल्हापुर की प्राचीन युद्ध कला प्रशिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों ने शस्त्र विद्या का प्रदर्शन कर हर किसी को हैरत में डाल दिया।

प्राचीन युद्ध कला प्रशिक्षण संस्थान कोल्हापुर के विद्यार्थियों द्वारा शस्त्र विद्या के हैरतअंगेज करतबों से सबको अचरज में डाल दिया। तलवार व लाठी का प्रदर्शन सराहनीय रहा। प्रशिक्षुओं ने सिर और बाजू पर रखकर नारियल तोड़ना भी आकर्षण का केंद्र रहा।

विनोद सलूके ने आसमान में उछालकर सिर से नारियल तोड़कर सबको चकित कर दिया। गायकों ने गीतों की प्रस्तुति से मराठों की वीरता की गाथा को रखा। गायक मनीषा ने शहीद मराठों याद करें तुम्हें आज यह वतन तुम्हारा और कर्मबीर फौजी ने प्रदीप मराठा द्वारा लिखा गीत ऐसी सच एक सामने आई ध्यान लगाकर सुनो बहन और भाई मराठा वीरेंद्र ने इस भेद का निकाला निचोड़ पानीपत की तीसरी जंग के बचे हुए मराठा हैं रोड़।
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