पानीपत। विश्व विख्यात उद्योग नगरी के असल सूत्रधार यहां रह रहे चार लाख प्रवासी हैं। इन प्रवासियों ने उद्योगों में 24 घंटे मेहनत कर पानीपत के उत्पाद तैयार किए और पानीपत को विश्व में एक पहचान दिलाई है। पानीपत के तौलिये, बेडसीट, बाथमेट, कुशन कवर व कंबल विश्व भर में प्रसिद्ध है। इन उत्पादों को बनाने वाले कारीगर प्रवासी ही हैं।
पानीपत के 20 हजार उद्योगों में काम करने वाले 90 प्रतिशत सुरक्षाकर्मी, मशीनों के मैकेनिक, लेबर, डिजाइनर, मैनेजर, मास्टर सुपरवाइजर प्रवासी ही हैं। पानीपत का वार्षिक निर्यात 16 हजार करोड़ व घरेलू बाजार 80 हजार करोड़ से अधिक है। पानीपत प्रदेश में गुरुग्राम के बाद सबसे अधिक 12 हजार करोड़ रुपये टैक्स देने वाली नगरी है। पानीपत को इस कदर सक्षम बनाने के पीछे प्रवासियों की कड़ी मेहनत है।
पानीपत में देश के हर कोने का व्यक्ति काम करते हुए मिल जाएगा। यहां उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, हिमाचल प्रदेश व राजस्थान के सबसे अधिक लोग रहते हैं। यहां के लोग पानीपत की राजनीति में भी अहम रोल निभाते हैं। पानीपत में 50 हजार से अधिक मतदाता प्रवासी ही हैं। पानीपत के उद्योग नगरी बनने की कहानी 1969 में शुरू हुई थी। जब दो उद्यमियों ने यहां खड्डी लगाई थी। इसके बाद टेक्सटाइल उद्योग में 1974 में क्रांति आई थी। स्थानीय लोग अपनी खेती व अपने कामों पर अधिक विश्वास करते थे। तब उद्योगों में काम करने के लिए दूसरे प्रदेशों से यहां लोग आने शुरू हुए थे। 1990 के बाद पानीपत के उद्योगों में प्रवासियों ने सबसे अधिक रोजगार पाया है। अब पानीपत के उद्योगों में लगभग तीन लाख लोग काम करते हैं। एक लाख प्रवासी रेहड़ी लगा या खेतों में काम कर अपना जीवन यापन करते हैं।
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खेती भी प्रवासियों पर निर्भर
धान की रोपाई के लिए किसान पूर्ण रूप से प्रवासियों पर ही निर्भर है। धान के सीजन में बिहार से खेत मजदूरों का जत्था यहां पहुंचता है। यह जत्था ही धान रोपाई करता है। किसानों को प्रवासी सस्ती लेबर के रूप में मिलते हैं।
अब प्रवासी भी बने उद्यमी
कभी यहां उद्योगों में मजदूरी के लिए आए प्रवासी अब उद्यमी बन चुके हैं। सेक्टर 29 पार्ट टू में ऐसे चार-पांच डायर्स हैं। जिन्होंने डाइंग हाउस में श्रमिक के रूप में काम किया। बाद में इन्होंने अपनी मेहनत से उस डाइंग हाउस को किराए पर लिया। अब वह अपना व्यापार कर रहे हैं। उनके पास सैंकड़ों श्रमिक काम करते हैं।
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प्रवासी हमारे परिवार का हिस्सा : खंडेलवाल
चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रदेश के चेयरमैन विनोद खंडेलवाल ने कहा कि पानीपत के लिए प्रवासी बेहद अहम है। ये हमारे परिवार का हिस्सा ही हैं। इनकी कड़ी मेहनत से पानीपत ने एक मुकाम हासिल किया है। इनके योगदान को भूला नहीं जा सकता। उद्यमी भी हर स्थिति में इनके साथ खड़े रहे हैं। पानीपत को टेक्सटाइल नगरी बनाने में प्रवासियों को बहुत बड़ा योगदान है।