शहर के बाजारों के दुकानदार व व्यापारी चिट फंड के फेर में एक के बाद एक उजड़ रहे हैं। इसी चक्कर में मैन बाजार का एक दुकानदार रातोंरात पलायन कर भाग गया। यह बाजार में इस तरह से दुकानदारों पर हमले की तीसरी घटना है। इससे पहले एक बाजार के प्रधान के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होना व एक दुकानदार की संदिग्ध मौत में चिट फंड ही माना जा रहा है। बीती रात को मैन बाजार के पलायन करने वाले दुकानदार पर करीब 22 दुकानदारों व व्यापारियों की करीब साढ़े तीन करोड़ की उधारी बताई गई है। शहर की बाजार एसोसिएशन भी इसको लेकर आगे आई हैं। एसोसिएशन के प्रधानों ने बैठक कर इस तरह के काम पर रोक लगाने की मांग की है। वहीं शहर थाना प्रभारी सुरेश कुमार बताया कि चिट फंड के चक्कर में एक दुकानदार के भागने का मामला संज्ञान में आया है। लेकिन किसी ने लिखित में कोई शिकायत नहीं दी है।
बाजार की कई व्यापारी एसोसिएशनों ने सोमवार को चौड़ा बाजार स्थित डीके हैंडलूम में बैठक की। व्यापारियों व उद्यमियों ने मैन बाजार स्थित गारमेंट के एक दुकानदार के रातोंरात गायब होन पर चिंता जताई। बैठक की अध्यक्षता सर्राफा और सुभाष बाजार के प्रधान राजेश सूरी ने की। प्रधानों ने बताया कि मैन बाजार स्थित गारमेंट के एक दुकानदार द्वारा कई कमेटी ले रखी थी। उसकी तरफ बाजार के करीब 22 दुकानदारों के करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये थे। उन्होंने बताया दुकानदार जब परिवार समेत पलायन कर था तब एक व्यापारी ने उसको रोकने का प्रयास किया था। लेकिन उसे धक्का देकर गिरा दिया। बाजारों की एसोसिएशनों के प्रधानों ने कहा कि प्रशासन व पुलिस को इस तरह के कामों पर रोक लगानी चाहिए। इस संबंध में जल्द ही प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। इस मौके पर मैन बाजार के प्रधान मुरली उर्फ मनीष सड़ाना, इंसार बाजार के गौरव लिख्खा, राजेश बवेजा, न्यू क्लाथ मार्केट के प्रधान विपिन चुघ व चौड़ा बाजार के प्रधान दर्शनलाल वधवा रहे।
पहले भी कई व्यापारी हो चुके है बर्बाद द
इंसार बाजार में दो महीने में दो दुकानदार चिट फंड के चक्कर में बर्बाद हो रहे हैं। जानकारी अनुसार बाजार का प्रधान पिछले लंबे समय से लापता है। वह चिट फंड में था और करोड़ों रुपये की उधारी उसकी तरफ थी। एक अन्य दुकानदार की पिछले दिनों संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उसकी तरफ भी चिट फंड की मोटी रकम थी। बीते साल मॉडल टाउन में रहने वाली एक महिला करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर फरार हो गई थी। लेकिन किसी ने पुलिस को शिकायत दर्ज नहीं करवाई।
विशेषज्ञों ने भी चिट फंड को बताया गलत
इनमें व्यक्ति एक नंबर का पैसा लगाकर दो नंबर का बना देता है। उन्होंने बताया कि कोई कर्मी अपने खाते से पैसे निकालकर चिट फंड में लगा देता है। वह हर माह इस तरह से करता है और चिट फंड का पैसे का आखिर में कोई रिकार्ड नहीं होता। उसके पास इस तरह से आया पैसा दो नंबर यानी कालेधन में गिना जाता है। उसको इस पैसे को व्हाइट मनी में बदलने के लिए फिर से बैंक जाना पड़ता है।
संजय जैन , सीए