पानीपत। मेजर आशीष धौंचक की शहादत के बाद बीते रोज सीएम के समक्ष मां ने अपना दर्द बयां किया था। साथ ही बहू पर बेरुखी के आरोप लगाए थे। मामले में अब मेजर की पत्नी ज्योति ने भी अपनी बात रखी है। उसका कहना है कि पति की मौत के बाद बेटी वामिनी ही उसका एकमात्र सहारा है। वह उसी के लिए जी रही है और ससुराल में ही रहना चाहती थी, लेकिन उत्पीड़न के कारण उसे मजबूर अपने मायके आना पड़ा। सेना ने उनको जो अधिकार और लाभ दिए हैं, उससे वह अपने पति और बेटी के सपनों को पूरा करना चाहती हैं। आरोप है कि अब उसके इस फर्ज को भी छीनने का प्रयास किया जा रहा है।
पानीपत के बिंझौल गांव निवासी शहीद मेजर आशीष धौंचक की पत्नी ज्योति सोमवार को सीएम से मिलने चंडीगढ़ पहुंची, जहां उसने सीएम के ओएसडी को पूरे मामले से अवगत कराया। साथ ही रविवार को पानीपत में सीएम के सामने सास कमला और ससुर लालचंद की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया।
ज्योति ने कहा कि उसके पति की शहादत से उस पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इस बीच उन्होंने खुद को मजबूत रखा और सास-ससुर को भी संभाला। उसने सेना द्वारा दिया गया लाभ ही लिया, जबकि सास को करीब डेढ़ करोड़ रुपये मिले हैं, जिसमें से उसने कुछ भी नहीं लिया। उसका कहना है कि ससुर की रजामंदी से ही उसने प्रथम तल पर अपना सामान रखा है, जबकि द्वितीय तल को किराये पर दिया गया है, जिसका किराया उसके सास-ससुर के पास आता है। उसकी तीनों ननद और उनके छह बच्चे वहीं पर रहते हैं। आरोप है कि सास और ससुर बहू को नहीं, बेटियों को घर में रखना चाहती हैं।
बेटी को आशीष की तरह काबिल बनाना है : ज्योति
ज्योति ने बताया कि वह आशीष की पेंशन ले रही है। उसको सेना पेंशन दे रही है। वह अपनी बेटी वामिनी को पढ़ा रही है और बेटी को आशीष की तरह काबिल बनाना चाहती है। उन्होंने बताया कि पंचायत मंत्री महिपाल ढांडा ने एक पक्ष की बात सुनकर कैबिनेट और मंच पर उनकी नौकरी का प्रस्ताव खारिज करने की बात कह दी। वे उनका पक्ष जानकर यह सब कहते या करते तो ज्यादा अच्छा होता।