संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। सावन माह शुरू होते ही प्राचीन सिद्ध देवी मंदिर में स्थापित तीनों शिवलिंग पर रुद्राभिषेक व जलाभिषेक के लिए सैकड़ों शिव भक्त मंदिर में पहुंचने लगते हैं। मंदिर में दो शिवलिंग लगभग 1100 साल पुराने हैं। दोनों शिवलिंग मराठों के समय से स्थापित हैं।
कहा जाता है कि मराठा भी इसी मंदिर में पूजा के लिए आते थे। तब से मंदिर में स्थापित लाल पत्थर के शिवलिंग की मान्यता बनी है। हर साल की भांति इस साल भी मंदिर में शिवरात्रि पर विशेष कार्यक्रम किया गया। शिव भक्तों के लिए रहने, खाने-पीने व दवा आदि की भी व्यवस्था मंदिर समिति द्वारा की गई।
मंदिर के पुजारी आचार्य लालमणि पांडेय ने बताया कि मंदिर का इतिहास लगभग 1100 साल पुराना है। मराठे जब पानीपत में आए थे उस समय भी मंदिर में दो शिवलिंग एक लाल पत्थर और दूसरी वट वृक्ष के नीचे स्थापित शिवलिंग मंदिर में था और मराठा शिव की पूजा करने के लिए मंदिर में आते थे। उसके बाद एक अन्य शिवलिंग भी स्थापित किया गया। मराठों के समय से मंदिर में शिवलिंग स्थापित है और हर सावन के महीने में सैकड़ों शिव भक्त जलाभिषेक व रुद्राभिषेक के लिए मंदिर आते हैं और भगवान शिव का दूध, शक्कर, सरसों का तेल, गन्ना, शहद चीनी से पूजा कर जलाभिषेक करते हैं।
शिव भक्तों की लगती है भीड़ प्रधान काकू बंसल ने बताया कि मंदिर में शिवलिंग तो प्राचीन समय से ही है। सावन माह शुरू होते ही शिव भक्तों की भीड़ सुबह लगनी शुरू हो जाती है।
मंदिर में प्रत्येक व्यवस्था बनाए रखने के लिए 25 सदस्यों की समिति बनाई गई है। जो प्रत्येक व्यवस्था का जायजा लेती है और उन्हें बनाए रखने में सहयोग करती है।