पानीपत। हत्या में 302 और दुराचार में 376 समेत कई धाराएं एक जुलाई से पुरानी बात हो जाएंगी। प्रदेश समेत पूरे देश में एक जुलाई को तीन नए आपराधिक कानून लागू होने जाएंंगे। जिले के पुलिस थानों में इसको लेकर कार्यक्रम किए जाएंगे। थानों में सरपंचों व मौजिज लोगों को जागरूक किया जाएगा।
कानून के जानकारों की माने तो भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं हैं। जिसमें 20 नए अपराधों को परिभाषित किया गया है। 33 अपराधों में सजा बढ़ाई गई है। 83 अपराधों में जुर्माने की रकम बढ़ाई है। नए कानून में आतंकवाद को भी परिभाषित किया है। इस बदलाव में आईपीसी की जगह भारतीय न्याय संहिता, सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य संहिता लागू होगी।
जिला पुलिस में इन बदलावों को लेकर पिछले लंबे समय से लंबी बैठक और सेमिनार चल रहे हैं। पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत इन सेमिनार में व्यक्तिगत रूप से शामिल हो रहे हैं। इन पर विस्तार से चर्चा करने के साथ अन्य जानकारियों को भी साझा कर रहे हैं।
नए कानूनों में कार्रवाई की समय सीमा निर्धारित की गई। शिकायत मिलने के तीन दिन में मुकदमा दर्ज करना जरूरी है। तीन से सात साल की सजा के कानूनों में थाना प्रभारी, उप पुलिस अधीक्षक या उनसे वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति लेनी होगी। इसमें 14 दिन के भीतर प्रारंभिक जांच करनी होगी। प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज करनी होगी। मुकदमा दर्ज करने के बाद पीड़ित को 90 दिनों के अंदर जानकारी देनी होगी। इसके साथ नए कानूनों के लागू होने पर ट्रायल कोर्ट को हर फैसला अधिक से अधिक तीन साल में देना होगा। महिला विरुद्ध अपराध से संबंधित मामलों में 60 दिन के अंदर जांच पूरी कर चालान न्यायालय में पेश करना होगा। मुकदमें में बहस पूर्ण होने के उपरांत न्यायालय द्वारा 30 दिन में फैसला देना होगा। जिससे अधिकतम 45 दिनों की अवधि तक बढ़ाया जा सकता है। अन्य संगीन मामलों में 90 दिन में जांच पूरी कर चालान पेश करना होगा। नए कानून लागू होने पर पुलिस संगीन मामलों में 60 दिन के अंदर दोबारा रिमांड ले सकती है।
नए कानून में तीन वर्ष से कम की सजा के मामलों में आरोपी 60 वर्ष से अधिक आयु का है तो उसकी गिरफ्तारी के लिए डीएसपी या उससे वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। दुष्कर्म व पाॅक्सो एक्ट के मामलों में जांच दो माह के भीतर पूरी करनी होगी। नए कानून के तहत पीड़ित को 90 दिन के भीतर अपने मामले की प्रगति पर नियमित रूप से जानकारी पाने का अधिकार होगा। इसके अलावा तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया के दौरान वीडियोग्राफी कराना अनिवार्य होगा।
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धाराओं में ये बदलाव
जिला न्यायवादी राजेश चौधरी ने बताया कि आईपीसी में यौन उत्पीड़न का अभियोग 354-ए धारा में दर्ज किया जाता है। इसको अब बीएनएस में 75 (2) धारा के तहत दर्ज किया जाएगा। दुष्कर्म को 376 धारा में दर्ज किया जाता है। इसको बीएनएस में 64 धारा के तहत दर्ज किया जाएगा। भारतीय दंड संहिता में (आईपीसी) में 511 धाराएं थी, लेकिन भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में 358 धाराएं रह गई हैं।