पानीपत। आज के समय में महिलाएं किसी की पहचान की मोहताज नहीं हैं जबकि स्वयं से साथ अन्य महिलाओं को भी रोजगार देकर सशक्त बना रही हैं। इन्हीं में से एक हैं सनौली खुर्द की ममता। ममता चार साल पहले तक अपने परिवार व बच्चों तक सीमित थी और पति के नाम से जानी जाती थी। ममता ने इन सबके बीच स्वयं सहायता समूह बनाकर ज्योत बनाना शुरू किया। वह आज खुद के साथ दस अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।
हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सनौली खुर्द की ममता ने बताया कि वह चार साल पहले गांव की शारदा के माध्यम से ही समूह से जुड़ी थी। समूह से जुड़ने से पहले वह घर, परिवार और बच्चों तक सीमित थी। उसे बाहर किसी व्यक्ति से अच्छे से बात भी नहीं कर पाती थी। आज वही ममता अन्य जिलों में जाकर स्टॉल भी लगा रही है और सामान बेच अच्छी आय कमा रही है। ममता ने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उसने स्वयं में बदलाव महसूस किया है। समूह से जरिये उसने ज्योत बनाने की एक मशीन करीब 24 हजार रुपये में खरीदी। पहले वह अकेली मशीन पर ज्योत बनाने का काम करती थी उसके बाद गांव की अन्य महिलाएं भी उसके साथ काम करने लगी तो उसने एक मशीन और समूह के जरिये खरीदी है। दोनों मशीनें उसके घर पर लगी हुई है। अब गांव की 10 महिलाएं उससे जुड़ चुकी है और वहीं आकर ज्योत बनाने, पैक करने का काम करती हैं। वह कई बार अन्य जिलों में स्टॉल लगाने के लिए जा चुकी है जहां से उसकी अच्छी आय हो जाती है।
एक पैकेट से तीन रुपये की होती है कमाई
ममता ने बताया कि वे ज्योत की छोटे और बड़े दो आकार के पैकेट बनाती हैं। छोटे आकार के पैकेट में लगभग 60 ज्योत होती हैं। इस पर सात रुपये का खर्च आता है। वह इसे दस रुपये में बेचती हैं। इसी तरह बड़े आकार के पैकेट में लगभग 120 ज्योत होती हैं। इसका रेट 20 रुपये है। दोनों पैकेट पर ही उसे तीन-तीन रुपये की बचत होती है।